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त्योहारी महीने ने दी ऑटोसेक्टर को राहत  

फेस्टिवल सीजन में 5 से 7% ज्यादा बिक्री हुई

आर्थिक सुस्ती से बेजार ऑटो सेक्टर को अक्टूबर महीने में राहत मिली है|भारतीय वाहन उद्योग बीते 10 माह से मंदी की मार से ख़ासा परेशान था|इस दौरान अशोक ले लैंड और मारूती जैसे बड़े संस्थानों को भी उत्पादन घटाने पर मजबूर होना पड़ा था|हालांकि धनतेरस और दिवाली के दौरान वाहनों की बिक्री में इजाफ़ा हुआ है| इस बार फेस्टिवल सीजन में 5 से 7% ज्यादा बिक्री हुई है।

लम्बे समय से बिक्री में कमी झेल रहे वाहन उद्योग को अक्टूबर महीने में राहत मिली है|आंकड़ों के मुताबिक धनतेरस पर वाहन डिलिवरी में पिछले साल के मुकाबले दोगुनी  ग्रोथ दर्ज की गई।लंबे वक्त के बाद मिली इस राहत से ऑटो सेक्टर में दोबारा से रौनक लौटी है।नवरात्रि से दशहरा तक मारुति ने कुल 60,000 कारों की डिलिवरी की जबकि हुंडई मोटर ने इस दौरान 25,000 कारें बेची हैं।धनतेरस पर मारुति की 45,000 और हुंडई की 14,000 कारों की बिक्री हुई।त्योहारी मौसम में कारों की सबसे ज्यादा मांग उत्तर और पूर्वी भारत से आयी है।यहां  पैसेंजर कार और दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री के  50-55 फीसदी की खरीद की गयी है। इस फेस्टिवल सीजन में एसयूवी को काफी अच्छी बिक्री मिली।जिनमे हुंडई वेन्यु 75,000 बुकिंग्स,एम जी हेक्टर को 36,000 बुकिंग्स तथा किया सेल्टोस को अब तक 50,000 यूनिट्स मिली है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज

बता दें भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी के लिए फेम-2 स्कीम लागू की।इस स्कीम के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सब्सिडी का प्रावधान भी किया गया था| इसके बावजूद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में कुल 50 हजार इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई जिसमें फेम स्कीम के तहत खरीदे गए इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की संख्या 3000 है। जबकि पिछले वित्त वर्ष में कुल 1,26,000 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी।काबिलेगौर है कि भारत में बिकने वाले कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी महज 0.5 फीसदी है। जिसमें अधिकांश टू-व्हीलर की बिक्री हुई है।