Arthgyani
होम > न्यूज > नई योजनाओं के साथ पुरानी योजनाओं का भी बोझ सरकार पर

नई योजनाओं के साथ पुरानी योजनाओं का भी बोझ सरकार पर

पिछले बजट की घोषणाएं लटकी हुई हैं अभी

बजट 2020 की घोषणाओं से ये तो तय हो गया है सरकारी विभागों के लिए अगला एक वर्ष काफी भाग दौड़ वाला रहेगा। एक तरफ तो उन्हें शनिवार को पेश बजट 2020-21 के प्रावधानों को अमल में लाने का काम करना है दूसरी तरफ पिछले बजट यानी जुलाई, 2019 में पेश 2019-20 के कई बजटीय घोषणाओं को भी आगे बढ़ाना है।

बजट के साथ सरकार की तरफ से बजटीय क्रियान्वयन से संबंधित कागजात को देखें तो साफ हो जाता है कि पिछले बार की कई अहम घोषणाएं अभी तक आगे नहीं बढ़ पाई हैं। सरकार की तरफ से पेश कागजात बताते हैं कि देश को नागरिक उड्डयन का केंद्र बनाने संबंधी घोषणा हो या इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए लाई गई फेम-दो नीति या तीन करोड़ खुदरा कारोबारियों को पेंशन देने की घोषणा हो, इन सभी को लागू करने की रफ्तार बहुत ही धीमी है।

कई स्कीमों को कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इसकी वजह यह बता रहे हैं कि पिछला बजट पेश किये हुए अभी सिर्फ सात महीने हुए हैं। ऐसे में कई ऐसी घोषणाएं है जिनके प्रारूप को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है या कई ऐसे घोषणाएं है जो कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। मसलन, राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के लिए मौजूदा स्कीम के स्थान पर नई स्कीम लागू करने का कैबिनेट नोट तैयार है।

रेंटल हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए एक मॉडल टेनेंसी कानून बनाने का ऐलान किया था। इसका का भी नोट तैयार है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द ही राज्यों को वितरित किया जाएगा।कमजोर व बंद होने वाले सरकारी उपक्रमों के जमीन पर सस्ते आवासीय इकाई बनाने की घोषणा को अमल में लाने के लिए कैबिनेट नोट तैयार किया जा रहा है। उक्त सारी घोषणाएं वित्त मंत्री ने पिछले साल के बजट में किया था। इन पर अमल अगले दो महीनों में संभव दिख रहा है लेकिन कई दूसरी ऐसी घोषणाएं भी हैं जिनका काम अगले वित्त वर्ष में जाने की पूरी उम्मीद है।

पिछले बजट की बहुत सी योजनायें जो अभी तक शुरू नहीं हुई हैं

वित्त मंत्री ने पिछले बजट में नागरिक उड्डयन सेक्टर, मीडिया (एनिमिशन) व बीमा सेक्टर को विदेशी निवेश के लिए और खोलने का ऐलान किया था। लेकिन बजट के साथ जो प्रपत्र दिए गये हैं उसके मुताबिक अभी इस बारे में विभिन्न मंत्रालयों के साथ विचार विमर्श शुरु ही हुआ है।

जैसे मीडिया में इक्विटी बढ़ाने को लेकर सूचना व प्रसारण मंत्रालय के साथ विमर्श हुआ है लेकिन अंतिम फैसला अभी कब होगा इसका पता नहीं है। इसमें सिर्फ एक घोषणा है जिसका पालन हुआ है और वह है सिंगल ब्रांड रिटेल सेक्टर के लिए स्थानीय सोर्सिग नियमों को बदलना।

पिछले वर्ष जुलाई में इसकी घोषणा हुई और 18 सितंबर को इसे अमल में लाने का प्रपत्र जारी कर दिया गया। वित्त मंत्री की एक दूसरी घोषणा जो लागू होने से अभी बहुत दूर है वह है सूचीबद्ध कंपनियों के लिए न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की सीमा मौजूदा 25 फीसद से बढ़ा कर 35 फीसद करना। सभी सरकारी उपक्रमों का कम से कम 25 फीसद शेयर निर्गम करने की घोषणा पर भी अमल की शुरुआत नहीं हुई है। इसी तरह से विनिवेश से संबंधित घोषणाओं में भी बहुत सारा काम किया जाना अभी शेष है।