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न्यूनतम मजदूरी और आयकर छूट सीमा बढ़ाने की वित्त मंत्री से अपील

बजट पूर्व बैठक में मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने अपनी माँगें वित्त मंत्री के सामने रखी है।

बजट पूर्व बैठक में प्रमुख मजदूर संगठनों ने अपनी मांग वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने रखी है। मजदूर संगठनों ने न्यूनतम मजदूरी की सीमा बढ़ाकर 21,000 रुपये करने का आग्रह किया है साथ ही कर्मचारी पेंशन योजना के तहत न्यूनतम पेंशन 6,000 रुपये करने और 10 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को इनकम टैक्स से मुक्त करने की भी सिफारिश की है।

देश में बढ़ती बेरोजगारी पर कर्मचारी संगठनों ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले कुछ साल में रोजगार सृजन के मामले में भारी गिरावट आई है। उन्होंने केंद्रीय बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजना, सामाजिक क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में निवेश करने और इन क्षेत्रों में खर्च को प्राथमिकता देने की मांग की है जिससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। कर्मचारी संगठनों द्वारा सभी रिक्त पदों को भरने की सरकार से अपील की गयी है। ज्ञात हो कि विभिन्न सरकारी विभाग रेलवे, सार्वजनिक उपक्रम और स्वायत्तशासी निकाय में अनेक पद रिक्त हैं।

मजदूर और कर्मचारी संगठनों की प्रमुख माँगें

  1. न्यूनतम मजदूरी की सीमा बढ़ाकर 21,000 रुपये की जाये।
  2. न्यूनतम पेंशन 6,000 रुपये कर दी जाएँ ।
  3. 10 लाख रुपये तक की सालाना आमदनी को इनकम टैक्स से मुक्त करें।
  4. विभिन्न सरकारी विभाग के सभी सरकारी रिक्त पदों को भरे जाएँ।
  5. इन्फ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में निवेश और खर्च को प्राथमिकता हो।
  6. कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर रोक लगे।
  7. रोजगार सृजन के विभिन्न उपाय जल्द किये जाएँ।
  8. बढ़ती मूल्य वृद्धि पर यथाशीघ्र रोक लगायी जाएँ।
  9. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत किये जाएँ।
  10. जमाखोरी पर यथाशीघ्र लगाम कसने चाहिए।

मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री से कहा कि बीएसएनएल, एमटीएनएल, आईटीआई सहित सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों को इसी क्षेत्र की दूसरी कंपनियों की तरह समान अवसर नहीं मिलने की वजह से हजारों लोगों की नौकरी पर खतरा पैदा हुआ है। श्रमिक संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि नए पदों के सृजन पर लगी रोक और सरकारी पदों में अनिवार्य रूप से कटौती जैसे आदेश हटाये जाएँ।

श्रमिक संगठनों ने बीएसएनएल- एमटीएनएल का विलय और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दिए जाने पर भी विरोध जताते हुए कहा कि यह वास्तव में नौकरी से जबरन हटाए जाने के समान है और रोजगार सृजन के विपरीत है। संगठनों ने बढ़ती मूल्य वृद्धि के प्रति विरोध करते हुए कहा कि मोदी सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करते हुए आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं के वायदा कारोबार पर तुरंत प्रभाव से रोक लगानी चाहिये और जमाखोरी पर यथाशीघ्र लगाम कसने चाहिए।