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पी-नोट के जरिये निवेश में दर्ज हुई गिरावट

जून में पी-नोट द्वारा भारतीय बाजार में कुल 81,913 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था।

पी-नोट उन विदेशी निवेशकों (FPO) को जारी की जाती है, जो भारतीय शेयर बाजार में बिना पंजीकरण के निवेश करना चाहते हैं। विदेशी निवेशकों में पी-नोट प्रचलित है। सेबी के पूंजी बाजार नियामक के अनुसार, इस वर्ष के जून माह में पी-नोट द्वारा भारतीय बाजार में कुल 81,913 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था। वहीं सितम्बर महीने में एफपीओ आंकड़ों के अनुसार भारतीय पूंजी बाजार में (शेयर, बांड और डेरिवेटिव्स) पी-नोट के जरिये निवेश में 76,611 करोड़ रुपए गिरावट दर्ज हुई, जो कि अगस्त में 79,088 करोड़ रुपए था। सितंबर के अंत तक किए गए कुल निवेश में से 50,676 करोड़ रुपए शेयर में, 25 करोड़ रुपए बांड तथा 241 करोड़ रुपए डेरिवेटिव्स में निवेश किए गए। बता दें, मई में पी-नोट निवेश 82,619 करोड़ रुपए था। पी-नोट के जरिये निवेश में 2017 से भी गिरावट हुई थी|

पी-नोट क्या है

पार्टिसिपेटरी नोट को (पी-नोट) के नाम से जाना जाता है। पी-नोट एक तरह का ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट होता है। ये निवेश के ऐसे वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स हैं, जिन्हें बाजार नियामक सेबी के पास रजिस्टर्ड एफआइआइ उन विदेशी निवेशकों को जारी करते हैं जो भारतीय शेयर बाजार में बिना पंजीकरण कराए निवेश करना चाहते हैं।

किस तरह कार्य करता है  

  1. पी-नोट अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट (ADR) और ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसीट (GDR) की तरह काम करता है, जिनमें निवेशक उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो देश के बाहर शेयर बाजारों में इंडेक्स होते हैं।
  2. विदेशी इन्वेस्टर्स को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्टर्ड फॉरन ब्रोकरेज फर्म्स की विदेशी यूनिट्स जारी करती हैं। ब्रोकर इंडियन सिक्यॉरिटीज (शेयर, डेट या डेरिवेटिव्स) में खरीदारी करते हैं और फीस लेकर उन पर क्लायंट को पी-नोट्स इश्यू करते हैं।
  3. भारत स्थित ये ब्रोकरेज घरेलू शेयर बाजार में इक्विटी खरीदते हैं और उनके बदले विदेशी निवेशकों को पी-नोट जारी करते हैं। जिन इक्विटी शेयरों के बदले पी-नोट जारी होते हैं उनमें मिलने वाला लाभांश या पूंजीगत लाभ भी विदेशी निवेशकों के हिस्से में जाता है।