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पॉल्ट्री इंडस्ट्री को मक्के की नई फसल आने से राहत की उम्मीद

सर्दी के कारण पॉल्ट्री ख़पत बढ़ेगी, लिहाज़ा फीड की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी।

पॉल्ट्री के कारोबार से जुड़ी कई कंपनियां पिछले कुछ समय से नुकसान में हैं क्योंकि एक ओर जहाँ चिकन की बिक्री 25-30 फीसदी घट गयी है वहीँ पिछले 100 दिनों में पॉल्ट्री फीड की कीमतों में 60 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस दोतरफ़ा नुकसान से पोल्ट्री इंडस्ट्री खासी दिक्क़तों का सामना कर रही है।
लेकिन मक्के की नई फसल आने से पॉल्ट्री इंडस्ट्री को पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान की भरपाई करने का मौक़ा मिल सकता है।

सुगना पॉल्ट्री फॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर जी बी सुंदरराजन ने बताया कि मुर्गियों का दाना (पॉल्ट्री फीड) महंगा होने और ख़पत घटने से मुर्गी फॉर्म्स और पॉल्ट्री के कारोबार से जुड़ी कंपनियों को भारी नुकसान हुआ है।
पॉल्ट्री इंडस्ट्री को उम्मीद है कि दिसंबर मध्य से सर्दी के कारण पॉल्ट्री ख़पत बढ़ेगी। लिहाज़ा फीड की आवश्यकता भी बढ़ेगी। ऐसे में नई फसल से इंडस्ट्री को राहत का अंदेशा है। साथ ही पॉल्ट्री की ख़पत बढ़ने से पॉल्ट्री की दामों में भी वृद्ध होगी।

एक नज़र

  • चिकन की बिक्री 25-30 फीसदी घट गयी है।
  • पिछले दिनों पॉल्ट्री फीड की क़ीमतों में 60 फीसदी का इजाफ़ा हुआ है।
  • पॉल्ट्री इंडस्ट्री अभी लागत से सस्ते दाम पर चिकेन की बिक्री कर रही है।
  • पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु में चिकेन की क़ीमत उत्पादन लागत से कम रही है।
  • दिसंबर से सर्दी के कारण पॉल्ट्री ख़पत बढ़ेगी।
  • पॉल्ट्री की ख़पत बढ़ने से पॉल्ट्री की दामों में भी वृद्ध होगी।
  • पॉल्ट्री फीड के लिए मक्का और सोयाबीन जैसे अनाजों की ज़रूरत पड़ती है।
  • मक्का की नई फसल से पॉल्ट्री इंडस्ट्री को राहत का अंदेशा है।

पॉल्ट्री फीड के लिए मक्का और सोयाबीन जैसे अनाजों की ज़रूरत पड़ती है। बीते दिनों मक्का और सोयाबीन के दामों में अचानक काफी वृद्धि हुई जिससे पॉल्ट्री फीड की क़ीमतों में 60 फीसदी का इजाफा हुआ। इसी के साथ पॉल्ट्री की ख़पत घटने से भी इंडस्ट्री को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार वेंकटेश्वर हैचरीज के डिप्टी जनरल मैनेजर सीआर सेल्वाकुमार ने बताया कि चिकन की बिक्री 25-30 फीसदी घटने से उत्पादन की अधिक लागत हम उपभोक्ताओं से वसूल नहीं पाए।

हालांकि, अक्टूबर में बाज़ार में आने वाला मक्का इस साल देरी से नवंबर में आने की उम्मीद है। मानसून देर से आने और भारी बारिश के चलते मक्का की फसल को नुकसान पहुंचा है और इसके देरी से आने का कारण बना। बावजूद इसके नई मक्का के बाज़ार में आने से पॉल्ट्री इंडस्ट्री को नुकसान में 50 फीसदी कटौती करने में मदद मिल सकती है।

पॉल्ट्री इंडस्ट्री अभी लागत से सस्ते दाम पर चिकेन की बिक्री कर रही है। पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु में चिकेन की क़ीमत उत्पादन लागत से कम रही है। नई मक्का के बाज़ार में आने की अटकलों से पिछले कुछ दिनों में क़ीमत लागत के बराबर आ गयी है।