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प्राकृतिक आपदा से चीनी के उत्पादन में दर्ज गिरावट

वर्ष 2019-20 में चीनी के उत्पादन में 12.38 फ़ीसदी गिरावट दर्ज हुई है|

इस वर्ष कई राज्यों में भारी वर्षा की वजह से कई राज्यों में उत्पादित फसलों पर काफी असर पड़ा है| तमिलनाडु और महाराष्ट्र वर्षा का प्रमाण ज्यादा रहा, इस वजह से टमाटर, प्याज, दलहन जैसी फसलों को काफी नुकसान हुआ| चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। वहीं महाराष्ट्र चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, हालांकि, बाढ़ और बारिश की वजह से उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है।

गौरतलब, महाराष्ट्र राज्य में पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष चीनी के उत्पादन में 4 मिलियन टन जितनी गिरावट मापी गई| पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार गन्ने उत्पादित राज्यों से मिली गणना के आधार पर खाद्य उत्पादन में वर्ष 2019-20 में चीनी के उत्पादन में 12.38 फ़ीसदी गिरावट दर्ज हुई है|

भारत देश में लगभग 534 चीनी की मिलें हैं। सरकार ने इस वर्ष गन्ने का उचित और पारिश्रमिक मूल्य (एफआरपी) 275 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में किसानों को केंद्र द्वारा निर्धारित एफआरपी के आधार पर भुगतान करना पड़ता है।

पेराई सीजन की शुरुआत

1 अक्टूबर 2019 से गन्ने की पेराई  शुरू कर दी गई, जिसमें वर्ष 2019-20 (अक्टूबर से सितंबर तक) में चीनी का उत्पादन 280 से घटकर 290 लाख टन पर रहा| जबकि पिछले साल देश में 331 लाख टन का उत्पादन हुआ था। कुल मिलाकर चीनी का उत्पादन 28-29 मिलियन का अनुमान किया जा रहा है| पेराई सीजन के आरम्भ होने के बावजूद उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में चीनी मीलों पर किसानों का बकाया है| सबसे ज्यादा बकाया उत्तर प्रदेश की मीलों पर है| जो कि 4,000 करोड़ से ज्यादा है|

विदित हो, वित्त वर्ष 2018-19 के (अक्तूबर से सितंबर) के दौरान चीनी का उत्पादन 33.1 मिलियन टन था। हालांकि, चीनी मीलों में आंशिक रूप से गन्ने की पेराई शुरू कर दी गई है, 15 नवंबर से पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा।