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बीएसएनएल और एमटीएनएल के विनिवेश का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

साल दर साल घाटे से बेहाल BSNL और MTNL

बीएसएनएल और एमटीएनएल के विनिवेश का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।चालू वित्त वर्ष में दोनों कंपनियों की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से 200 करोड़ और 300 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है। ये बातें दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरूवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहीं|

संसद में दिया जवाब:

बड़े वित्तीय संकट से जूझ रही बीएसएनएल और एमटीएनएल के विनिवेश को लेकर कयास लगाये जा रहे थे|गौरतलब है कि सरकार ने सार्वजनिक छेत्र की विभिन्न लाभकारी कंपनियों के विनिवेश को मंजूरी देने के बाद घाटे में चल रही BSNL और MTNL के विनिवेश की भी आशंका व्यक्त की जा रही थी| इस आशय से उच्च सदन में पूछे गये एक प्रश्न में मोदी सरकार का पक्ष रखते हुए दूरसंचार मंत्री ने रखा|उन्होंने संकटग्रस्त दूरसंचार सार्वजनिक उपक्रमों भारत संचार निगम लिमिटेड और महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड की हिस्सेदारी बेचने या विनिवेश की किसी भी योजना से स्पष्ट इनकार कर दिया|हालांकि उन्होंने दोनों कंपनियों की परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण से 200 करोड़ और 300 करोड़ रुपये जुटाने की बात जरूर कही|वित्त वर्ष के दौरान मुद्रीकृत होने वाली विशिष्ट संपत्तियों की पहचान अभी नहीं की गई है।

साल दर साल घाटे से बेहाल:

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान लिखित जवाब में रविशंकर प्रसाद  ने बताया कि, कैबिनेट ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के पुनरुद्धार की योजना को मंजूरी दे दी है।इसमें बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय के लिए सैद्धांतिक मंजूरी शामिल है।”केंद्रीय मंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार बीएसएनएल का घाटा 2017-18 से दोगुना होकर वर्ष 2018-19 में लगभग 15,000 करोड़ रुपये हो गया है। इसके अलावा इसका राजस्व भी वित्त वर्ष 2019 में घटकर 19,321 करोड़ रुपये रह गया है।बीएसएनएल को 2017-18 में 7,993 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था |जबकि एमटीएनएल को 2018-19 में 3,398 करोड़ रुपये और 2017-18 में 2,971 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।MTNL का राजस्व 2018-19 में घटकर सिर्फ 2,607 करोड़ रुपये हो गया है।