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बैंकिंग फ्रॉड में 74 फीसदी इजाफ़ा

आरबीआई की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचने के निर्देश देने वाले बैंक खुद भी फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं|इसे आंतरिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ विषय माना जाता है|एक ओर  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस तरह की घटनाएं रोकने की तमाम कोशिशे कर रहा है| दूसरी ओर बैंक धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं|आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के फ्रॉड में 74 फीसदी का इजाफा हुआ है|

क्या कहती है रिपोर्ट?

RBI द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक 2018-19 में 71,543 करोड़ रुपये की कुल धोखाधड़ी हुई जबकि इससे पूर्व वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 41,167 करोड़ रुपये था| काबिलेगौर है कि धोखाधड़ी के मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे आगे हैं|इस प्रकार के  कुल मामलों में 55.4 फीसदी फ्रॉड सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़े थे| जबकि  धनराशि के मामले में यह आंकड़े 90.2 फीसदी है|निजी क्षेत्र और विदेशी बैंकों की धोखाधड़ी में कुल धोखाधड़ी में हिस्सेदारी क्रमश: 30.7 फीसदी ओर 11.2 फीसदी रही।धन राशि में इन बैंकों की हिस्सेदारी क्रमश: 7.7 फीसदी और 1.3 फीसदी रही|आरबीआई रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सरकारी बैंकों में परिचालन जोखिमों से निपटने में आंतरिक प्रक्रियाओं,और प्रणाली में अब भी काफी खामियां मौजूद हैं|

नॉन परफॉर्मिंग अकाउंट से हुआ खुलासा:

विदित हो कि सरकार ने इसी साल फरवरी में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में धोखाधड़ी का समय पर पता लगाने, उसकी सूचना देने और जांच को लेकर रूपरेखा जारी किया था| इसके तहत बैंकों को 50 करोड़ रुपये से अधिक के नॉन परफॉर्मिंग अकाउंट में धोखाधड़ी की आशंकाओं का आकलन करने की आवश्यकता है ताकि धोखाधड़ी वाले लेन-देन का खुलासा समय पर हो सके|आरबीआई की  रिपोर्ट के अनुसार संभवत: इसी कारण 2018-19 में धोखाधड़ी के ज्यादा मामले सामने आए|

एनपीए में कमी:

आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार बैंकों का सकल एनपीए अनुपात 2018-19 में घटा है| जिसमें इससे पहले लगातार 7 साल वृद्धि हुई थी| रिपोर्ट के मुताबिक सालाना आधार पर एनपीए के मोर्चे पर अच्छा सुधार दिखता है| जहां 2017-18 में एनपीए अनुपात 11.2 फीसदी था, वह 2018-19 में घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया| इस लिहाज से सालाना आधार पर 2.1 फीसदी की कमी आई है|