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भारतीय कागज उद्योग में 2.4 करोड़ टन कागज उत्पादन करने का अनुमान

अगले पांच सालों में कागज की घरेलू खपत को 2.4 करोड़ टन पहुंचने का है अनुमान

भारत देश में हर साल करीब 3 करोड़ टन जितना कागज का उत्पादन होता है|देश के घरेलू कागज बाजार से लगभग टनों में निर्यात होता है|पिछले तीन सालों में देश से कागज निर्यात 6.6 लाख टन से बढ़कर 15 लाख टन हो गया है।  वर्तमान समय में पूरे भारत देश में 462 कागज की मीलें हैं। भारत हर साल कागज उद्योग से जुड़ी दुनिया की सबसे बड़ी प्रदर्शनी का आयोजन करता है, जिसे पेपरएक्स के नाम से जाना जाता है|

भारत में पेपरएक्स प्रदर्शनी का आयोजन

इस वर्ष पेपरएक्स प्रदर्शनी 3 से 6 दिसंबर तक दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित रहेंगें| इस प्रदर्शनी में उद्यमियों को इस उद्योग के ताजा रुझानों और प्रौद्योगिकी को एक साथ देखने समझने तथा नए पुराने उद्यमियों को आपस में मिलने का एक बड़ा अवसर मिलता है। पेपरएक्स में 28 देशों के 700 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे। जिसमें करीब 30,000 कारोबारीयों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है।

प्रति वर्ष घरेलू कागज़ उद्योग में वृद्धि

एजेंसी की खबर के अनुसार देश में कागज उद्योग में औसतन सालाना 12 प्रतिशत की दर से उत्पादन में वृद्धि होती है इसके  साथ ही अगले पांच सालों में 2024-25 तक कागज की घरेलू खपत को 2.4 करोड़ टन पहुंचने का अनुमान किया जा रहा है। कागज विनिर्माताओं के संघ इंडियन पेपर एंड मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन की एक विज्ञप्ति के अनुसार पूरे विश्व में कागज की खपत 1.5 करोड़ टन है।

एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और सेंचुरी पेपर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे. पी. नारायण ने बताया कि कागज उद्योग बदलाव के दौर से गुजर रहा है। कुछ बड़ी कागज कंपनियां अपने किसी क्षेत्र, उत्पाद या श्रेणी विशेष की मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही हैं।

इस प्रदर्शनी से घरेलू कागज उद्योग में विलय और एकीकरण की ओर रुझान बढ़ेगा। कंपनियों के विलय होने से उत्पादन में और बढ़त होगी, इस क्षेत्र का अत्यधिक विस्तार होगा|यह उद्योग श्रमबल पर आधारित है, इस वजह से देश में रोजगार बढ़ेगा| ऐसा पहली बार होगा कि केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) पहली बार प्रतिभागी बनेंगें|देशभर के 1,100 से अधिक लघु और कुटीर उद्योग (MSME) शामिल होंगें|