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भारत की GDP होगी 5.1% : एडीबी

5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्‍य को झटका

भारत की 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर होने की पहल को आर्थिक सुस्ती से काफी नुकसान पहुंचा है|मंदी के कारण बिक्री और उत्पादन की दर प्रभावित हुई है|जिसके परिणाम स्वरुप विभिन्न वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत की विकास दर में अविश्वास प्रकट करते हुए हुए कटौती की है|इसी कतार में शामिल हो गया ADB(Asian Devlopment Bank)|एडीबी बैंक ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारत की वृद्धि दर को 6.5 से घटाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है|

इन आधारों पर की कटौती:

एडीबी बैंक ने अपनी रिपोर्ट में विभिन्न कारणों का उल्लेख किया है| बैंक के अनुसार नौकरियों के सृजन की सुस्त रफ्तार और खराब फसल की वजह से ग्रामीण इलाकों की हालत खराब होने की वजह से उसे अपने जीडीपी अनुमान में कटौती करनी पड़ी है| एडीबी ने भी कहा कि साल 2018 में एक बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के बर्बाद होने से वित्तीय क्षेत्र में जोखिम बढ़ा है| जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के समक्ष कर्ज संकट खड़ा हुआ है| बदहाल स्थिति तथा रोजगार की धीमी वृद्धि दर ने उपभोग को बुरी तरह प्रभावित किया है|

कब सुधरेंगे हालात?

काबिलेगौर है कि इसके पहले एडीबी ने सितंबर में भारत की जीडीपी दर  2019-20 के लिए 6.5 प्रतिशत और 2020-21 में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था| बैंक के अनुसार यदि सरकार ने सही नीतियां अपनाईं तो अगले वित्त वर्ष में जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़कर 6.5 फीसदी तक पहुंच जाने की भी पूरी संभावना है|

सरकार का सिरदर्द बढ़ा:

गिरती जीडीपी मोदी सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बनती जा रही है| विदित हो कि  चालू वित्त वर्ष (2019-20) की दूसरी तिमाही में जीडीपी का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया है| यह बीते 6 साल में किसी एक तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट है| 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्‍य पर काम कर रही मोदी सरकार के लिए जीडीपी की गिरावट को संभालना एक बड़ी समस्या बनती जा रही है| वित्तीय जानकारों के मुताबिक 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के GDP की रफ्तार 8 प्रतिशत होनी चाहिए| जबकि अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को देखते हुए फिलहाल ये दर प्राप्त करना मुश्किल लग रहा है| ये अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक समेत क्रिसिल एवं मूडीज जैसी विश्व स्तरीय एजेंसियों ने लगाये हैं|