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भारत को डंपिंग ग्राउंड बनाने की इजाजत नहीं देंगे:गोयल

एफटीए की वजह से 1100 फीसदी का नुकसान

व्यापारिक या राजनैतिक रिश्तों के लिए दरवाजे कभी बंद नहीं होते, लेकिन हम किसी भी देश को भारत को डंपिंग ग्राउंड बनाने की इजाजत नहीं देंगे।भारत यूरोपीय यूनियन के साथ एफटीए को लेकर फिर से बातचीत शुरू कर सकता है। ईयू के साथ एफटीए होने से भारत को कई क्षेत्र में व्यापारिक लाभ मिल सकते हैं।ये बातें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कही|वे भारत के आरसीईपी से पीछे हटने के कारण बता रहे थे|

रीजनल कंप्रेहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) से हुए नुकसान को बताते हुए उन्होंने कहा कि,मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) होने की वजह से भारत को 2004-2014 के दौरान व्यापार में 1100 फीसदी का नुकसान हुआ।2004 में आरसेप देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा 7 अरब डॉलर का था जो वर्ष 2014 में बढ़कर 78 अरब डॉलर हो गया।

भारत के हित को सुरक्षित नहीं रखा गया:

गोयल ने  बताया कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा  कोरिया, जापान, मलेशिया जैसे देशों के साथ जो एफटीए हुआ उसके तहत भारत के हित को सुरक्षित नहीं रखा गया। भारत को इन देशों के बाजार की जो उपलब्धता मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिली। वहीं, भारत के ऐसे कई सेक्टर को इन देशों के लिए खोल दिए गए जिससे भारतीय व्यापार प्रभावित हुए।वाणिज्य मंत्रालय इन देशों के साथ किए गए एफटीए की समीक्षा करेगा। कोरिया के साथ हुए एफटीए की समीक्षा शुरू हो गई है। जापान भी समीक्षा के लिए तैयार हो गया है।

भारतीय हितों को देखकर पीछे हटी मोदी सरकार:

केंद्रीयमंत्री का ये बयान ऐसे समय आया है जब कि दो दिन पहले ही भारत ने मुक्त व्यापार समझौते में नहीं शामिल होने का निर्णय लिया है|विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीयों हितों के प्रतिकूल बताया था|आरसीईपी  से अलग होने की वजह बताते हुए पीयूष ने बताया कि मोदी सरकार से पहले आसियान देशों के साथ जो एफटीए किया गया उसके तहत भारत ने 74 फीसदी उत्पादों को आयात शुल्क से मुक्त कर दिया। वहीं इंडोनेशिया ने सिर्फ 50 फीसदी उत्पादों के आयात को शुल्क मुक्त किया|जबकि उस समय इंडोनेशिया की आर्थिक हालत भारत से बेहतर थी। उन्होंने कहा कि आरसेप समझौते पर भारत ने भारत के किसान, कारोबार व व्यापार के हित को देखते हुए नहीं किया क्योंकि उस समझौते में कई चीजें भारत के हित की नहीं थी।