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भारत में कारोबार करना आसान हो : सुनील मित्तल

उद्योग जगत ने की ज्यादा आजादी की मांग

मैं सिर्फ एक ही मांग लेकर इस बैठक में शामिल हुआ और वह है भारत में कारोबार करने को आसान बनाना। ये बेबाक मांग है देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी भारती टेलीकॉम के मुखिया सुनील भारती मित्तल की|वे गुरूवार को बजट पूर्व परामर्श में उद्योग जगत की समस्याओं पर सरकार को सुझाव दे रहे थे|विदित हो कि देश की प्रमुख टेलीकाम कंपनी एयरटेल वित्तीय संकट से जूझ रही है|इस बैठक में देश के नामी उद्योगपतियों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उद्योग जगत की चिंताओं से वाकिफ कराया|

उद्योग जगत ने की ज्यादा आजादी की मांग:

बजट पूर्व परामर्श में उद्योग जगत ने गुरूवार को अपनी समस्याएं बताई|देश ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैकिंग में भले ही काफी सुधार कर लिया हो लेकिन अपने देश के उद्योगपतियों की सबसे बड़ी मांग यही है कि घरेलू स्तर पर कारोबार के माहौल में सुधार की सबसे ज्यादा जरुरत है।उद्योग जगत की सामूहिक राय के अनुसार सरकार को नीतिगत स्थिरता पर भी ध्यान देना होगा। बता दें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश के कुछ नामी गिरामी उद्यमियों के साथ बजट पूर्व बैठक की थी|जिसमें अलग अलग स्तर पर इन बातों को रखा गया। देश के दो बड़े उद्योग चैंबरों सीआइआइ और एसोचैम के अध्यक्षों ने परोक्ष तौर पर उद्योग जगत को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए ज्यादा आजादी की मांग पेश की।

नीतियों में स्थिरता नहीं रही:

परामर्श बैठक में सीआइआइ के अध्यक्ष विक्रम किर्लोस्कर ने अपने प्रजेंटेशन में आटोमोबाइल, खनन, रिटेल और ऊर्जा क्षेत्र का उदाहरण दिया है,जहां नीतियों में स्थिरता नहीं रही और इसकी वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।उद्यमियों ने आटोमोबाइल सेक्टर में कारपोरेट एवरेज फ्यूल इफिसिएंशी (केफ-1) का उदाहरण दिया जिसे फरवरी, 2017 में लागू किया।जबकि दूसरे देशों में कंपनियों में इसके लिए कम से कम सात वर्षो का समय दिया गया था। उद्योगपतियों के अनुसार टैक्स से लेकर पॉलिसी तक में यदि सुनिश्चितता बनी रहे तो कारोबारियों को लंबी अवधि की अपनी रणनीति बनाने में आसानी होगी। उद्योग जगत ने आगामी बजट में वित्त मंत्री से इन विषयों पर ध्यान रखने की आशा व्यक्त की|

उद्योग जगत से जुड़े कानूनी मसलों पर त्वरित फैसले की जरूरत:

बजट पूर्व परामर्श बैठक में सीआइआइ ने कारोबार के स्तर पर पैदा हो रही कई तरह की कानूनी दिक्कतों की तरफ भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया| उनकी मांग थी कि  उद्योग जगत से जुड़े कानूनी मसलों पर त्वरित फैसले की व्यवस्था करना मौजूदा अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरुरी है।कंपनी ने खुदरा कारोबार में सोर्सिग के नियमों में लगातार किये गए बदलाव पर सवाल उठाये।उद्यमियों के अनुसार नियमों में इस तरह की अस्थिरता से निवेशकों का भरोसा नहीं बन पाता। परामर्श बैठक में बड़े उद्योग की राय से स्पष्ट है कि उद्योग जगत कारपोरेट टैक्स की रेट में की गई कटौती से आगे भी बहुत कुछ चाहते हैं|