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भारत में गहन आर्थिक सुस्ती है: अरविंद सुब्रमण्यन

निजी कंपनियों पर बढ़ता कर्ज बैंकों का एनपीए बन रहा

निश्चित रूप से यह साधारण सुस्ती नहीं है।भारत में गहन सुस्ती है और अर्थव्यवस्था ऐसा लगता है कि आईसीयू में जा रही है।ये विचार हैं नरेंद्र मोदी सरकार के पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के|उन्होंने ये टिप्पणी हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय विकास केंद्र के लिए तैयार तकनीकी परचे के मसौदे में की|उनकी इस टिप्पणी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के संकट पर चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हो गया है|विदित हो कि उन्होंने अगस्त 2018 में अपने पड़ से इस्तीफा दे दिया था|

भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहराता संकट:

विश्व की तमाम रेटिंग एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती पर टिप्पणी कर चुकी है|भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास भी इस आशय में अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं| इसके बावजूद मोदी सरकार के विभिन्न मंत्री कई बार इस बात से इनकार कर चुके हैं|वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी कई मौकों पर इसे गंभीर संकट मानने से इनकार कर चुकी हैं| ऐसे में अरविंद सुब्रमण्यन की इस टिप्पणी पर राजनीतिक चर्चा के पूरे आसार हैं|विपक्ष पहले भी महंगाई,अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर चुका है|

क्या लिखा है शोध पत्र में?

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन की बुधवार को की गयी टिप्पणी भारत ‘गहरी आर्थिक सुस्ती’ में है सभी समाचार पत्रों ने प्रकाशित की है|उन्होंने कहा बैंकों तथा कंपनियों के लेखा-जोखा के जुड़वा-संकट की ‘दूसरी लहर’ के कारण अर्थव्यवस्था सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में जा रही है। बता दें अरविंद ने ये टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के भारत कार्यालय के पूर्व प्रमुख जोश फेलमैन के साथ लिखे गए नए शोध पत्र में की है| सुब्रमण्यन के अनुसार भारत इस समय बैंक, बुनियादी ढांचा, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और रियल एस्टेट- इन चार क्षेत्रों की कंपनियां के लेखा-जोखा के संकट का सामना कर रहा है। इसके अलावा भारत की अर्थव्यवस्था ब्याज दर और वृद्धि के प्रतिकूल चक्र में फंस गई है।

निजी कंपनियों पर बढ़ता कर्ज बैंकों का एनपीए बन रहा:

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने लिखा है कि,उन्होंने दिसंबर, 2014 में दोहरे बही खाते की समस्या के प्रति आगाह किया था।उन्होंने निजी कंपनियों पर बढ़ता कर्ज से बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बनने के विषय में सरकार को चेताया था|अपने नए शोध पत्र को सुब्रमण्यन ने दो भागों टीबीएस और टीबीएस-दो में बांटा है। टीबीएस-1 इस्पात, बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनियों को दिए गए बैंक कर्ज के बारे में है। यह कर्ज निवेश में जोरदार तेजी के दौरान 2004-11 के दौरान दिया गया, जो बाद में एनपीए बन गया। टीबीएस-दो नोटंबदी के बाद की स्थिति के बारे में है।इसमें गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और रियल एस्टेट कंपनियों के बारे में है।