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भारत सरकार मंदी दूर करने को लें तुरंत ऐक्शन – IMF

देश में जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए भारत सरकार को यह सलाह दी है।

देश में आर्थिक मंदी को संभालने के लिए भारत सरकार को जल्दी ही कुछ क़दम उठाने की ज़रूरत है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF-International Monetary Fund) ने देश में जीडीपी ग्रोथ को बढ़ाने के लिए भारत सरकार को यह सलाह दी है। भारत की इकॉनमी को दुनिया के ग्रोथ इंजनों में से एक करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष संस्था ने कहा कि मौजूदा स्थिति से उबरने के लिए जल्दी ही कुछ क़दम उठाने की ज़रूरत है।

IMF – उपभोक्ता मांग में कमी, टैक्स रेवेन्यू में गिरावट से अर्थव्यवस्था में एक ब्रेक जैसा लगा है

IMF ने अपनी वार्षिक समीक्षा में कहा कि खपत और निवेश में गिरावट, कर राजस्व में गिरावट, ने दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक पर ब्रेक लगाने का काम किया है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि  “अधिक समावेशी और टिकाऊ विकास के बिना भारत के युवा और तेजी से बढ़ते श्रम बल से अगले कुछ दशकों में भारत का संभावित जनसांख्यिकीय लाभांश बर्बाद हो सकता है।”  IMF ने कहा कि अपेक्षाकृत कम खाद्य क़ीमतों ने “ग्रामीण संकट” में भूमिका निभाई है। इसमें जीएसटी जैसे कुछ अहम और उचित सुधारों को लागू करने में हुई दिक्क़तों की भूमिका भी हो सकती है।

IMF – भारत की अर्थव्यवस्था मंदी के चलते वैश्विक संस्था को उसे डाउनग्रेड करना पड़ेगा

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंचने के बीच अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने भी कहा कि भारत सरकार को घरेलू मांग में नरमी दूर करने के लिए बैंकों के खाते को साफ करने और श्रम सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए।  भारत की अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते वैश्विक संस्था को उसे डाउनग्रेड करना पड़ेगा।

IMF – मौजूदा स्थिति से उबरने के लिए जल्दी ही कुछ क़दम उठाने की ज़रूरत है

IMF ने कहा कि मौजूदा मंदी को समाप्त करने और एक बार फिर से भारत को ऊंची ग्रोथ रेट की ओर ले जाने के लिए तत्काल नीतिगत ऐक्शन लेने की ज़रूरत है। हालांकि आईएमएफ ने कहा कि सरकार ने ख़र्च बढ़ाने के अवसरों को सीमित किया है।

आईएमएफ के एशिया ऐंड पैसिफिक डिपार्टमेंट से जुड़े रानिल सालगादो ने कहा, ‘लाखों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में है।’