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भारत 14,000 करोड़ के कॉपर का आयातक देश बना

वित्त वर्ष 2017-18 तक भारत कॉपर कैथोड का निर्यात किया करता था|

भारत एक ऐसा देश है जो कि अधिकतर वस्तुओं का निर्यात करता है| जैसे कि कृषि उत्पादों आदि चीजों का निर्यातक देश है| वित्त वर्ष 2017-18 तक भारत कॉपर कैथोड का निर्यात किया करता था| लेकिन अब तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वेदांता कॉपर प्लांट बंद होने की वजह से भारत देश कॉपर कैथोड का आयत करना पड़ता है। ध्यान दें, तमिलनाडु सरकार ने पिछले साल मई में खूनी विरोध प्रदर्शन के बाद कॉपर स्मेल्टर को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया था|

रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स से मिली जानकारी के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2018-19 में भारत ने 14,000 करोड़ रुपये कीमत का रिफाइंड कॉपर आयात किया| इस तरह 18 सालों बाद भारत रिफाइंड कॉपर का आयातक देश बन गया है| वित्त वर्ष 2018 के दौरान भारत द्वारा कॉपर के निर्यात में 87.4 फीसदी गिरावट देखने को मिली| उसी दौरान आयात में 131.2 फीसदी की बढ़त देखने को मिली| वर्ष 2018-19 में चीन को भारत से कॉपर के निर्यात में 63 फीसदी हिस्सेदारी बढ़कर 75 फीसदी हो गई| इसी वर्ष में भारत का जापान से आयात का हिस्सा 2017-18 में 68 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 71 फीसदी हो गया|

बता दें, 2018-19 में भारत ने जापान, कांगो, सिंगापुर, चिली, तंजानिया, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण अफ्रीका से रिफाइंड कॉपर का आयात किया| वहीं, चीन, ताइवान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया और बांग्लादेश को रिफाइंड कॉपर का निर्यात किया|

भारत देश ऐसा पहला देश बन गया है जो कि कॉपर धातु अयस्क का आयताक बन गया है| देश में कॉपर की खानों की कमी के कारण करीब 90 फीसदी कॉपर आयात करना पड़ता है| कॉपर प्लांट बंद होने से पिछले वित्त वर्ष में कॉपर अयस्क और इसके अवययों का आयात 44.6 फीसदी गिरावट आई|