Arthgyani
होम > म्यूच्यूअल फंड > म्युचुअल फंड

मंदी से प्रभावित हैं म्युचुअल फंड के रिटर्न

बीते 5 सालों में म्युचुअल फंड के रिटर्न में आयी है गिरावट

अर्थव्यवस्था में मंदी का प्रभाव म्युचुअल फंड के रिटर्न पर भी नजर आने लगा है|म्युचुअल फंड के कम होते रिटर्न से निवेशक हताश भी हो रहे हैं|फंड से मिले हालिया प्रतिलाभ को देखते हुए ये लाजिमी भी है|आपको बता दे बीते 5 सालों में म्युचुअल फंड में निवेशकों को मिलने वाले प्रतिलाभ में काफी गिरावट नजर आयी|इस रिटर्न की तुलना अगर पीपीएफ फंड से करें तो पीपीएफ ने भी कमाई के मामले में म्युचुअल फंड को पीछे छोड़ दिया है|2014-19 के पांच साल के औसत रिटर्न की बात करें तो इस दौरान पीपीएफ ने 8.21% की औसत से  रिटर्न दिया है।जबकि लॉर्ज कैप म्यूचुअल फंड ने निवेशकों को सिर्फ 7.79% का प्रतिलाभ  दिया है।हालांकि मिडकैप, स्मॉलकैप ने थोड़ा बेहतर प्रदर्शन करते हुए क्रमश: 9.51% और 9.39% की दर से रिटर्न दिया है।ये वो आंकड़े हैं जो निवेशक के नजरिये से ठीक नहीं माने जा सकते|ऐसे में आपकी निवेश योजना क्या होनी चाहिए इसे निम्नलिखित बिन्दुओं से समझने की कोशिश करते हैं|

गलत तुलना न करें:

कम प्रतिलाभ मिलने की स्थिति में निवेशक प्रायः गलत तुलना करने लगते हैं|उपरोक्त प्रतिलाभो को यदि निवेशक के नजरिये से देखें तो ये रिटर्न निश्चित रूप से बहुत कम हैं|ऐसे में कई बार निवेशक इनकी तुलना पीपीएफ के रिटर्नों से करने लगता है|निवेशक का तर्क है कि पीपीएफ में बिना जोखिम अधिक रिटर्न मिला है| ध्यान रखिये ये बिलकुल गलत तुलना है क्योंकि म्युचुअल फंड सीधे तौर पर बाजार से प्रभावित होते हैं|बाजार नीचे आने की स्थिति में ऐसा हो सकता है|किंतु निवेश के लम्बे समय स्थिति बिलकुल विपरीत हो जायेगी|इसलिए गलत तुलना करके अपना निवेश ख़त्म न करें|

भविष्य पर रखें नजर:

म्युचुअल फंड में रिटर्न कम होना सिर्फ समय की बात है|ये रिटर्न लम्बे समय तक ऐसे ही नही रहेंगे|2002-03 के दौरान आई मंदी के समय जब जीडीपी निचले स्तर पर थी तब भी म्युचुअल फंड के निवेशको को बेहतर रिटर्न मिला था। बाजार में शेयरों का मुल्य कम होने की स्थिति में निवेशक को अधिक यूनिट अलॉट होता है।भविष्य में बाजार ऊपर जाने की दशा में ये बढे हुए यूनिट बड़ा प्रतिलाभ बन जायेंगे|

समय के साथ होगा सुधार:

सरकार ने अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के कई कदम उठाएं हैं।जिनका असर समय के साथ नजर आएगा|जिसका असर कुछ समय बाद नजर आएगा| जिसके बाद अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेजी होगी  तो उसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ेगा|

निवेश जारी रखें:

बाजार टूटने के दौरान अक्सर निवेशक निवेश करना बंद कर देते हैं| ये गलत अवधारणा है|जिससे सिर्फ आपका नुकसान होगा|जान लीजिये शेयर बाजार से जुड़ा हर निवेश जोखिम से भरा होता है|इक्विटी आधारित हर फंड बाजार की गिरावट और तेजी से प्रभावित होता है|अतः मौजूदा समय में कम मुल्य पर मिलने वाले यूनिट का लाभ अवश्य लें|

एसआईपी से करें निवेश:

यदि आप बड़ी रकम से जोखिम नही लेना चाहते तो एसआईपी के माध्यम से निवेश करें| विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट का दौर हो तो एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे आसान और सही तरीका है।यह एकमुश्त रकम के मुकाबले निवेशकों को जोखिम कम करने में मदद करता है।