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जुलाई-सितंबर तिमाही में मकानों के मूल्य में मात्र 0.6% की हुई वृद्धि

वैश्विक संपत्ति सलाहकार नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग सुस्त पड़ने की वजह से घरों के दामों में मामूली वृद्धि हुई

मंदी का असर लगता है अब रियल एस्टेट क्षेत्र में भी दिखने लगा है| एक रिपोर्ट के अनुसार मकानों की कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में दुनिया के टॉप 56 देशों की सूची में भारत फिसलकर 47वें स्थान पर  आ गया है| चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में देश में घरों की कीमतों में मात्र 0.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है|

वैश्विक संपत्ति सलाहकार नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है| रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग सुस्त पड़ने की वजह से घरों के दामों में बहुत मामूली वृद्धि हुई| विदित हो कि नाइट फ्रैंक के पिछले अप्रैल-जून तिमाही रिपोर्ट में घर कीमतों में बढ़ोतरी के मामले में भारत 11वें स्थान पर रहा था| उस दौरान देश में घरों की कीमतों में 7.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ था|

सांख्यिकी आंकड़ों के आधार पर घर कीमतों का आकलन

नाइट फ्रैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट वैश्विक आवास मूल्य सूचकांक तीसरी तिमाही 2019 में 56 देशों और स्थानों पर आधिकारिक सांख्यिकी आंकड़ों के आधार पर घर कीमतों का आकलन किया है| भारत इसमें 56 देशों की सूचि में 47वें स्थान पर है|रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं| उनमें से बिक्री की सुस्त रफ्तार, बिना बिके मकानों का स्टॉक और डेवलपर्स के पास नकदी की कमी वे मुख्य वजह हैं जिससे जुलाई-सितंबर तिमाही में घरों की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है|

सूची में हंगरी पहले स्थान पर

आंकड़ों के अनुसार इस सूची में हंगरी पहले स्थान पर है| तिमाही के दौरान सालाना आधार पर हंगरी में घर 15.4 प्रतिशत महंगे हुए| लग्जमबर्ग में इनकी कीमतों में 11.4 प्रतिशत और क्रोएिशया में 10.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ| स्लोवाकिया इस सूची में 9.7 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है| लातविया नौ प्रतिशत के साथ पांचवें, चेक गणराज्य (8.7 प्रतिशत) छठे, चीन (8.5 प्रतिशत) सातवें, जर्सी (8.5 प्रतिशत आठवें), मेक्सिको (8.4 प्रतिशत) नौवें और रूस (8.1 प्रतिशत) दसवें स्थान पर हैं|

विदित हो की भारत में बीते कुछ समय से मंदी और बेरोजगारी की दरों में वृद्धि हुई है और इससे लोगों की क्रय क्षमता में कमी आई है| इन सब बातों का नकारात्मक प्रभाव अन्य क्षेत्रों के साथ रियल इस्टेट सेक्टर पर भी पड़ा है| बाकी जो कारण नाइट फ्रैंक संस्था द्वारा बताए गए हैं वे तो महत्वपूर्ण है ही| भारतीय रियल इस्टेट सेक्टर इन  समस्याओं से पार पाकर फिर से बूम करेगा ऐसी उम्मीद है|