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केंद्र सरकार ने मटर के आयात पर लगाया प्रतिबंध

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने न्यूनतम आयातित मूल्य 200 रूपए किया निर्धारित

विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना जारी करके मटर के आयातित मूल्य को कम से कम 200 रूपए रखने का आदेश दिया है| ऐसा करने के पीछे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय व विदेश व्यापार महानिदेशालय की मंसा देश के मटर के उत्पादन को बढ़ाना और किसानों को संरक्षित करना है| ऐसा लगता है जैसे सरकार ने मटर के आयात मूल्य को न्यूनतम 200 रूपए रखने के पीछे आयात को पूरी तरह से हतोत्साहित करना है, क्योंकि वर्तमान में बाज़ार में मटर का खुदरा दाम 100 से 150 रूपए के मध्य है| ऐसे में कौन व्यापारी 200 रूपए के मटर का आयात करेगा|

न्यूनतम मूल्य में बीमा, भाड़ा और मटर का मूल्य होगा शामिल 

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के हवाले से विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अपनी अधिसूचना में मटर आयात निति में संसोधित करते हुए कहा, ‘मटर का आयात DGFT (Directorate General of Foreign Trade) द्वारा अधिसूचित प्रक्रिया के अनुसार 1.5 लाख मीट्रिक टन के वार्षिक (वित्तीय वर्ष) कोटा के अधीन होगा और यह प्रति किलोग्राम 200 रूपए और इससे अधिक CIF (Cost, Insurance, and Freight) की आयात कीमत के अधीन होगा एवं आयात केवल कोलकाता समुद्री पत्तन के माध्यम से अनुमत है| यह प्रतिबन्ध किसी द्विपक्षीए अथवा क्षेत्रीय समझौता अथवा समझौता ज्ञापन के तहत सरकार की आयात प्रतिबद्धताओं के लिए लागू नहीं होगा|’

18 दिसंबर को अधिसूचित यह अधिसूचना तुरंत प्रभाव से लागू हो गई| इस अधिसूचना के ये प्रभाव होंगे:

  1. प्रभावी दिवस से पीली मटर, हरी मटर, डन मटर और कास्प मटर सहित सभी तरह के कच्चे मटर पर यह प्रतिबन्ध लग गया है, और किसी भी तरह के मटर के आयात के लिए कम से कम 200 रूपए/KG मूल्य निर्धारित किया गया है| इस मूल्य में मटर का दाम, बीमा और भाड़ा शामिल होगा| अर्थात सभी मूल्यवर्धन के बाद जो मूल्य होगा वह 200 रूपए से कम नहीं हो सकता है|
  2. मटर का आयात सिर्फ कोलकाता पोर्ट के माध्यम से सीमित कर दिया गया है| अर्थात मटर का आयात किसी अन्य माध्यम या पत्तन के द्वारा नहीं किया जा सकता है|
  3. मटर के आयात के लिए सरकार के द्वारा पूर्व में किए गए समझौते इस अधिसूचना में प्रभावी नहीं होंगे|
  4. मटर के आयात को प्रतिबंधित करने के यह प्रतिफल होगा कि भारत के व्यापारी अब विदेशों से मटर के आयात के विकल्प से दूर रहेंगे और वे भारतीय मटर को खरीद कर बाज़ार में आपूर्ति करेंगे|
  5. किसानो को भी इस कदम से लाभ होगा| चूंकि व्यापारी आयातित मटर की खरीद को प्राथमिकता नहीं देंगे जिससे घरेलू मटर को अच्छा मूल्य प्राप्त होगा और अंततः इस बढे मूल्य का फायदा किसानों को होगा|
  6. मटर के मूल्य में वृद्धि होगी| चूंकि आयातित मटर का देशी मटर के लिए प्रतिस्पर्धा के लिए उपलब्ध न होने की वजह से देशी मटर का कोई प्रतिस्पर्धी नहीं होगा| फलतः मटर के खुदरा मूल्य में वृद्धि हो सकती है| इसके लिए प्रशासन को जमाखोरी पर लगाम रखनी होगी अन्यथा मटर के मूल्य भी प्याज के जैसे आसमान को छू सकते हैं|