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2020 मे केंद्र सरकार मनरेगा के तहत बढ़ा सकती है मजदूरी 

सरकार ये फैसला बढती हुई महंगाई को देखते हुए लेने जा रही है।

केंद्र सरकार मनरेगा के तहत एक अहम् फैसला लेने जा रही है। सरकार ये फैसला बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए लेने जा रही है और उससे निपटने के लिए मनरेगा मजदूरी को 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। इससे  ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम- MNREGA (Mahatma Gandhi National Rural Employment Generation Act) को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक- कृषि श्रम के साथ जोड़ने की योजना बना रही है, जिससे मजदूरों को ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है । इसके साथ सरकार प्रधानमंत्री किसान योजना और मनरेगा के तहत किसान व मजदूरों के लिए चलने वाली योजनाओं को मजबूत करने की कोशिश कर रही है ।  सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि घटते संसाधनों से निपटने के लिए सरकार इसके उपाय कर रही है । सरकार मनरेगा से अलग किसानो को अन्य फसलों के लिए भी प्रेरित कर रही है। सरकार का कहना है कि किसानों को गेहूं और चावल के अलावा दूसरी फसलों की खेती करने की भी जरूरत है साथ ही ऐसी फसलों की खेती भी की जाये जिसमे मुनाफा ज्यादा मिल सके। सरकार इस बात पर भी जोर दे रही है कि cold-storage यानी ठंडे गोदाम और वेयरहाउस यानी गोदाम (Warehouse) का संजाल कर यानी नेटवर्क टैक्स में छूट देकर और क्रेडिट सुविधा दे कर इनको बढ़ावा दिया जाए।

कृषि को भी बढ़ाना चाहती है सरकार

सरकार इन योजनाओ के तहत अलग अलग वित्त पेश करती रही है लेकिन अधिकारियों का कहना हैं कि NABARD – National bank Of Agricultur And Rural Development “राष्ट्रीय ग्रामीण एवं कृषि विकास बैंक” के  तहत कृषि अवसंरचना निधि (Agriculture Infrastructure Fund) में  2 हज़ार करोड़ रूपये का वित्तीय अनुदान किया जाता है। लेकिन, इस तरह के बड़े स्तर पर काम करने के लिए ये वित्तीय अनुदान पर्याप्त नहीं है। सरकार को और अलग बजट आवंटन (Budget Allocation) करने की आवश्कयता है। क्योंकि अभी तक के बजट आवंटन से पर्याप्त लाभ नहीं मिल सकता है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण कृषि योजना के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाज़ार के लिए भी वित्तीय  अनुदान की उम्मीद है। न्यूज़ 18 से मिली ख़बरों के अनुसार अधिकारियों ने ये भी बताया कि कृषि शुभारंभ करने के लिए अलग अनुदान करने का प्रस्ताव किया है ताकि किसान को जरूरत की चीज़ें मिल सके और वो आगे बढ़ने मे सक्षम हो सके। सरकार का मानना है कि ज्यादा से ज्यादा निजी कोष कृषि क्षेत्र में आयें, जिसके लिए अहम कदम उठाया जायेगा।