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ओड़िशा और झारखण्ड से मांगी मंजूरी लौह अयस्क की नीलामी के लिये

निम्न गुणवत्ता वाले अयस्क की नीलामी की मांगी मंजूरी

सरकार द्वारा चलायमान इस्पात कंपनी सेल ने ओडिशा और झारखंड के खदानों के पास पड़े निम्न गुणवत्ता वाले करीब सात करोड़ टन लौह अयस्क की नीलामी के लिये दोनों राज्यों की सरकारों से मंजूरी मांगी है। एक विशेषज्ञ ने कहा कि अयस्क में लोहे की मात्रा के आधार पर इसे बाजार में 40-45 से लेकर 62 डॉलर प्रति टन तक की कीमत मिल सकती है।

एक सूत्र ने बताया कि इस्पात बनाने में निम्न गुणवत्ता वाले अयस्क का इस्तेमाल इसमें से गंदगी निकालकर तथा इन्हें पैलेट बनाकर किया जा सकता है। सेल के पास निम्न गुणवत्ता के अयस्क को बेहतर बनाने की तकनीक व सुविधा नहीं है। इस कारण सेल इन अयस्कों की खपत नहीं कर पा रही है।

सूत्रों के हवाले से

सूत्र ने यह पूछे जाने पर कि ये अयस्क खदानों में कब से पड़े हुए हैं, कहा, ‘‘निम्न गुणवत्ता वाले अयस्क सेल की शुरुआत के समय से ही जमा हो रहे हैं। कंपनी ने इनकी नीलामी के लिये ओडिशा और झारखंड सरकार से मंजूरी की मांग की है।’’ सूत्र ने कहा कि सेल को मंजूरी मिल जाने का भरोसा है। उसने बताया कि इन अयस्कों की नीलामी का विचार इस्पात मंत्रालय ने दिया है।

एक झलक:

  • सरकारी इस्पात कंपनी सेल ने ओडिशा और झारखंड के खदानों के पास पड़े निम्न गुणवत्ता वाले करीब सात करोड़ टन लौह अयस्क की नीलामी के लिये दोनों राज्यों की सरकारों से मंजूरी मांगी है।
  • एक विशेषज्ञ ने कहा कि अयस्क में लोहे की मात्रा के आधार पर इसे बाजार में 40-45 से लेकर 62 डॉलर प्रति टन तक की कीमत मिल सकती है।
  • एक सूत्र ने बताया कि इस्पात बनाने में निम्न गुणवत्ता वाले अयस्क का इस्तेमाल इसमें से गंदगी निकालकर तथा इन्हें पैलेट बनाकर किया जा सकता है।
  • ल के पास निम्न गुणवत्ता के अयस्क को बेहतर बनाने की तकनीक व सुविधा नहीं है। इस कारण सेल इन अयस्कों की खपत नहीं कर पा रही है।
  • कंपनी ने इनकी नीलामी के लिये ओडिशा और झारखंड सरकार से मंजूरी की मांग की है।’’ सूत्र ने कहा कि सेल को मंजूरी मिल जाने का भरोसा है।
  • उसने बताया कि इन अयस्कों की नीलामी का विचार इस्पात मंत्रालय ने दिया है।