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2020 तक ‘BharatNet’ के जरिए 2.5 लाख गांवों को मिलेगी मुफ्त WiFi

डिजिटल ग्राम योजना में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सही मायने में बदलने और डिजिटल अंतर को कम करने की है क्षमता- रविशंकर प्रसाद

इन्टरनेट में वह क्षमता है जो किसी भी देश में बहुत बड़ा बदलाव ला सकती है और भारत का वास्तविक विकास गांवों के द्वारा ही हो सकती है, क्योंकि भारत की 70% जनसंख्या ग्रामों में ही निवास करती है और भारत अभी भी गांवों का ही देश है| डिजिटल ग्राम योजना में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सही मायने में बदलने और डिजिटल अंतर को कम करने की क्षमता है| इसी बात का ध्यान रखते हुए केंद्र सरकार ने भारत के गांवों को इन्टरनेट से जोड़ने के कार्य में तेजी लाने का निर्णय किया है| केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि भारतनेट के जरिये जुड़े देशभर के गांवों को मार्च 2020 तक मुफ्त WiFi दिया जाएगा| विदित हो कि सरकार का लक्ष्य मार्च, 2019 तक ही पूर्ण करने का था| हाल ही में रविशंकर प्रसाद ने कहा था की भारत में विश्व की सबसे सस्ती इन्टरनेट सेवा है|

सभी गांवों को मार्च 2020 तक मुफ्त WiFi

प्रसाद ने कहा कि, ‘ हम 1.3 लाख ग्राम पंचायतों को भारतनेट ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ चुके हैं| हमारा लक्ष्य 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को इससे जोड़ने का है| भारतनेट सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए हम भारतनेट के माध्यम से जुड़े सभी गांवों को मार्च 2020 तक मुफ्त वाई – फाई देंगे|’ ज्ञात हो कि वर्तमान में भारतनेट परियोजना के तहत जुड़े 48000 गांवों में वाईफाई की सुविधा है| केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री ने कहा कि साझा सेवा केंद्रों (common service center-CSC) पर बैंकिंग सेवाओं की पेशकश की जाएगी| इन केंद्रों की संख्या 2014 में 60,000 से बढ़कर मौजूदा समय में 3.60 लाख हो गई है|

CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड देश के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल ग्राम पहल को लागू कर रहा है| कुल मिलाकर एक लाख गांवों को डिजिटल गांव में तब्दील करने की तैयारी है| साथ ही साझा सेवा केन्द्रों (CSC) में ई-बैंकिंग सेवाएं देने का प्रयास भी किया जा रहा है| CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश त्यागी ने कहा कि  ‘डिजिटल ग्राम योजना में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सही मायने में बदलने और डिजिटल अंतर को कम करने की क्षमता है|’

BharatNet परियोजना क्या है?

भारतनेट परियोजना (BharatNet Project) नेशनल ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) का नया ब्रांड नाम है, जिसे सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए अक्टूबर 2011 में लॉन्च किया गया था| 2015 में इसका नाम बदलकर भारत नेट रखा गया था| इस परियोजना का उद्देश्य राज्यों तथा निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी से ग्रामीण तथा दूर-दराज़ के क्षेत्रों में नागरिकों एवं संस्थानों को सुलभ ब्रॉड बैंड सेवाएं उपलब्ध कराना है| इसके तहत ब्रॉडबैंड की गति 2 से 20 mbps तक होगी| यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund-USOF) के तहत भारतनेट परियोजना को बजट मुहैया कराया जा रहा है|

BSNL के VRS स्कीम की सफलता से स्पीड बढ़ने की उम्मीद  

हम आपको बता दें कि 8 जनवरी, 2018 को भारतनेट परियोजना का पहला चरण सरकार द्वारा पूरा कर लिया गया था यानी की देश में तकरीबन 1 लाख ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछ चुका है| साथ ही इसके दूसरे चरण में भी ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी और मार्च 2019 तक इसको पूरा करने का लक्ष्य था| मगर BSNL के कर्मचारियों स्वैच्छिक सेवानिवृति (VRS) न हो पाने से यह थोडा धीमा था मगर अब चूंकि BSNL अपने VRS के लक्ष्य को प्राप्त कर चूका है, इसलिए उम्मीद है कि BSNL अपने जिम्मे का कार्य द्रुतगति से पूर्ण कर पाए और सरकार मार्च 2020 तक BharatNet परियोजना के पूर्ण करने के लक्ष्य को पूर्ण कर पाए| विदित हो कि भारतनेट के अंतर्गत फाइबर के पूरे रखरखाव का काम BSNL देखती आई है| आगे भविष्य में BBNL भारतनेट फाइबर के रखरखाव का काम भी हम अपने जिम्मे लेने की प्रक्रिया में हैं| इसके लिए उसने सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) से इस चीज की अनुमति देने का आग्रह किया है| Bharat Broadband Network Limited (BSNL) ने ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड पहुंचाने का 70 फीसदी काम BSNL और 15-15 फीसदी रेलटेल एवं पावरग्रिड को आवंटित किया हुआ है|

Fibre बिछाने के काम प्राइवेट कंपनियों को पट्टे पर देने का विचार 

बताते चले कि हाल ही में डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (Digital Communications Commission-DCC) ने सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम भारतनेट (BharatNet Programme) के अंतर्गत 2.5 लाख किलोमीटर तार (Fibre) बिछाने के काम को प्राइवेट कंपनियों को पट्टे पर देने या बेचने की मुद्रीकरण प्रक्रिया को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी थी| मगर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस बारे में कुछ नहीं बताया|

यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतनेट विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड संपर्क करने का कार्यक्रम है| इसको मेक इन इंडिया के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है| यानी कि इसमें कोई भी विदेशी कंपनी का सहयोग नहीं लिया जा रहा है| इस प्रोजेक्ट का प्रथम उद्देश्य था की मौजूदा ओप्टिकल फाइबर नेटवर्क को ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाना| क्या आपको पता है कि सरकार ने इस नेत्व्रोक को दूरसंचार सेवा के लिए उपलब्ध करवाया है और ग्रामीण क्षेत्रों में देता, आवाज और वीडियो के माध्यम से संचरण आराम से हो सके एक ऐसे नेटवर्क की परिकल्पना की है| इसके लिए राज्य और निजी क्षेत्रों के साथ साझेदारी करके ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में नागरिकों या लोगों को सस्ती ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करना है|