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मेंथा तेल के भाव में 30 फीसदी गिरावट

भारत है दुनिया का सबसे बड़ा मेंथा तेल का उत्पादक

वैश्विक मंदी एवं  प्राकृतिक मेंथा तेल की मांग कमजोर रहने के कारण भारत के मेंथा उत्पादक किसानों को इस बार उम्मीदों के मुताबिक फसलों का दाम नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल मेंथा तेल के भाव में तकरीबन 30 फीसदी गिरावट आई है। पिछले साल मेंथा तेल का भाव अच्छा मिलने से उत्पाहित किसानों ने इस साल मेंथा की खेती में काफी दिलचस्पी दिखाई थी|जिससे उत्पादन में तकरीबन 10 फीसदी का इजाफा हुआ, लेकिन औद्योगिक मांग कमजोर होने के कारण कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है।

बता दें भारत दुनिया में प्राकृतिक मेंथा तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया के कुल उत्पादन में भारत का तकरीबन 80 फीसदी योगदान है। खास बात यह है कि देश के कुल उत्पादन का करीब 75 फीसदी मेंथा तेल भारत निर्यात करता है।
आईएएनएस से बातचीत में उत्तर प्रदेश के मेंथा तेल कारोबारी अरविंद अरोड़ा ने बताया कि इस साल देश में मेंथा तेल का उत्पादन तकरीबन 50,000 टन है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 10 फीसदी ज्यादा है। देश में सबसे ज्यादा मेंथा तेल का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, इसके बाद मध्यप्रदेश में भी अब मेंथा की खेती होने लगी है।

उत्तर प्रदेश में बदायूं, बाराबंकी, चंदौसी और संभल प्राकृतिक मेंथा तेल का प्रमुख उत्पादक बाजार है। चंदौसी के कारोबारी आशुतोष रस्तोगी ने बताया कि पिछले साल मेंथा तेल का भाव जहां 1,800-1,900 रुपये प्रति किलो तक चला गया था वहां इस समय 1,240-45 रुपये प्रति किलो है।रस्तोगी ने बताया कि कृत्रिम मेंथा तेल का इस्तेमाल बढ़ने से भी प्राकृतिक मेंथा तेल के दाम में गिरावट आई है।

मध्यप्रदेश में अगले महीने मेंथा की नई फसल आने वाली है जिससे सप्लाई और बढ़ जाने से कीमतों पर दबाव रहेगा।
देश के सबसे बड़े कमोडिटी वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर बीते शुक्रवार को मेंथा तेल का अक्टूबर वायदा अनुबंध 1,204 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ जबकि पिछले साल 31 अक्टूबर को मेंथा तेल का वायदा भाव 1,846 रुपये प्रति किलो था। इस साल नौ जुलाई को मेंथा तेल का भाव एमसीएक्स पर 1,176 रुपये प्रति किलो तक लुढ़क गया।

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि वैश्विक मंदी के कारण मेंथा तेल की औद्योगिक मांग कमजोर बताई जा रही है, जबकि सप्लाई काफी ज्यादा है, जिससे मेंथा तेल उत्पादकों को उनके उत्पादों अच्छा भाव नहीं मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि दो साल पहले जर्मनी केमिकल कंपनी बास्फ की एरोमा प्लांट में आग लगने के बाद कृत्रिम मेंथा उत्पाद की सप्लाई प्रभावित होने से भारत से प्राकृतिक मेंथा तेल की मांग में जोरदार इजाफा हुआ था और घरेलू उत्पादकों को उनके उत्पादों की काफी ऊंची कीमत मिली थी।