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मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती पर: IMF का समर्थन

राजकोषीय मोर्चे पर भारत की राह मुश्किल है, इसलिए भारत को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए|

आईएमएफ (International Monetary Fund) ने मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती पर लिए गए निर्णय का समर्थन करते हुए बताया कि इस छूट से भारत में निवेश का सकारात्मक असर होगा| यह भी बताया कि भारत को राजकोषीय स्थिति से निपटने के लिए मौजूद चुनौतियों का समाधान करना चाहिए ताकि इस मोर्चे पर लंबे समय तक मजबूती बनी रहे|

बता दें, पिछले महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतीरमण ने कॉरपेरेट टैक्स में कटौती का ऐलान जारी किया था| इस एलान बाद कॉरपोरेट टैक्स घटाकर 22 फीसदी कर दिया गया था, जो Cess और Surcharge के साथ 25.17 फीसदी हो गया| गौरतलब, IMF के डायरेक्टर (एशिया एवं प्रशांत विभाग) चांगयोंग री ने एक सम्मेलन में कहा कि, IMF का मानना है कि राजकोषीय मोर्चे पर भारत की राह मुश्किल है, इसलिए भारत को सावधानी से चलना चाहिए|

Cess (सेस) जो करदाता की Income  पर जो Tax लगता है उस पर कुछ निश्चित दर से Cess लगाया जाता है| Cess किसी विशेष कार्य या उद्देश्य के लिये लगाया जाता है| इसे निश्चित रूप से वसूल किया जाता है|

Surcharge (सरचार्ज) भारत में दो तरह के Income Surcharge है, जो आय की एक निश्चित सीमा के बहार जाने पर आय पर जो Tax होता है उस पर Tax लगाए जाते है| यह  केवल आय निश्चित सीमा से ज्यादा होने पर ही वसूला जाता है|

  • 50 लाख से आय ऊपर होने पर – जो Income Tax Liability है उसका 10% Surcharge,
  • अगर 1 करोड़ से ऊपर इनकम है – तो Income Tax Liability पर 15% Surcharge लगता है|

इस वर्ष वृद्धि दर 6.1% रहने का अनुमान

IMF के डायरेक्टर का यह भी कहना है कि, पिछली दो तिमाहियों की सुस्ती को देखते हुए इस वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जो बढ़कर 2020 में सात प्रतिशत हो जाएगी| मौद्रिक नीति में किये गये उपाय और कॉरपोरेट टैक्स में कटौती से निवेश में सुधार होने की उम्मीद है| NBFCs की मुश्किलों को दूर करने की जरूरत है|

सरकारी बैंकों में पूंजी डालने के साथ कुछ सुधार हुए हैं लेकिन गैर-बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र की दिक्कतें बनी हुई हैं| उनको रेगुलेट करना भी एक चुनौती है|  भारत के कर्ज का स्तर ऊंचा है और राजकोषीय मोर्चे के सुधार पर  प्राथमिकता होना चाहिए|