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म्युचुअल फंड में निवेश पर कंपाउंडिंग का प्रभाव

म्युचुअल फंड में कंपाउंडिंग के कारण उच्च रिटर्न मिलता है

भविष्य की अनिश्चितताओं और आवश्यकताओं को देखते हुए निवेश एक अत्यंत आवश्यक प्रक्रिया है|जीवन निरंतर परिवर्तीत होता रहता है|आयु एवं अन्य प्राकृतिक प्रभाव मनुष्य की शक्ति को भी प्रभावित करते हैं|इसके अतिरिक्त महंगाई एवं वैश्विक व भौगोलिक परिवर्तन भी जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं|अतः हर व्यक्ति को अपने सुरक्षित भविष्य एवं भविष्य से जुड़ी योजनाओं के लिए निवेश अवश्य करना चाहिए|

क्या है निवेश?

लोग प्रायः बचत एवं निवेश को लेकर भ्रमित रहते हैं| निवेश का अर्थ है अपने धन को किसी संपत्ति या योजना में प्रयुक्त करना जहां पर आपको लगता है कि मूल्य में वृद्धि होगी या दीर्घकालीन प्रतिलाभ प्राप्त होंगे। निवेश का मुख्य उद्देश्य है  निश्चित समय में नियमित आय या रिटर्न उत्पन्न करना।अतः यदि आप भी वित्तीय रूप से सुरक्षित होना चाहते हैं, तो आपातकाल के लिए धन का निर्माण करें|  निवेश आपको मुद्रास्फीति  के प्रभाव एवं भविष्य आधारित योजनाओं के लिए तैयार रखता है|निवेश के पारम्परिक माध्यमों में धातु आधारित निवेश,संपत्ति में किया गया निवेश तथा मियादी जमा जैसी विभिन्न योजनाएं हैं|जबकि निवेश के आधुनिक माध्यमों में म्युचुअल फंड,शेयर बाजार जैसे माध्यम उपलब्ध हैं|इन माध्यमों में निवेश से उच्च रिटर्न प्राप्त होते हैं|

क्या है कम्पाऊंडीग(चक्रवृद्धि)?

निवेश में कम्पाऊंडीग  का विशेष महत्त्व होता है|चक्रवृद्धि ब्याज के कारण ही म्युचुअल फंड उच्च प्रतिलाभ देने में सक्षम हो जाते हैं|चक्रवृद्धि ब्याज का अर्थ उस ब्याज से है, जिसकी गणना सिर्फ प्रारंभिक मूलधन से ही नहीं बल्कि मूलधन पर संचित ब्याज के आधार पर की जाती है। चक्रवृद्धि ब्याज निवेश के सबसे शक्तिशाली उपकरणों में से एक है|सरल शब्दों में कहें तो कम्पाऊंडीग का अर्थ है ब्याज पर ब्याज अर्जित करना। चक्रवृद्धि ब्याज की गणना मूलधन और संचित ब्याज के योग पर की जाती है।उदाहरण के तौर पर समझें कि यदि निवेशित राशि 10 लाख थी, तो यह संख्या चक्रवृद्धि ब्याज के प्रभाव से कई बार विकास के क्रम में परिवर्तित होती  जाती है। 20 वर्षों की निवेश अवधि में सामान्य ब्याज दरों पर भी निवेशित राशि  67 लाख से अधिक (10% विकास दर पर) हो जाती है।

चक्रवृद्धि ब्याज का सूत्र:

चक्रवृद्धि ब्याज के प्रभाव को हम उसके  निम्नलिखित सूत्र के आधार पर सरलता से समझ सकते हैं|

पी = सी (1 + आर / एन) एनटी

यहाँ * P भविष्य का मूल्य है * C व्यक्तिगत जमा है * r ब्याज दर है * n ब्याज दर को प्रति वर्ष कम करने की संख्या है * t वर्षों की संख्या है|

कंपाउंडिंग के कारक:

म्युचुअल फंड में कंपाउंडिंग मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करती है|जो राशि या मूलधन,अवधि और ब्याज दर हैं।इसके अतिरिक्त आवृत्ति भी कंपाउंडिंग का एक अन्य प्रमुख कारक है। यह लगातार, दैनिक, साप्ताहिक, मासिक,अर्ध-वार्षिक,वार्षिक रूप से परिवर्तित होती है।कैलकुलेटर का उपयोग करके समझा जा सकता है कि समय के साथ कंपाउंडिंग के प्रभाव से निवेश का अंतिम मूल्य कैसे बदल जाता है। यह वास्तव में कंपाउंडिंग की शक्ति दिखाएगा।

एसआईपी पर कंपाउंडिंग का प्रभाव :

एसआईपी म्युचुअल फंड में निवेश के सर्वाधिक प्रचलित तरीकों में शुमार है|SIP नियमित रूप से निवेश के सिद्धांत पर काम करता है। यह एक प्रकार की आवर्ती जमा की तरह है जिसमें हर महीने निवेश के रूप में छोटी राशि डाली जाती है|ये ज्यादा निवेश के स्थान पर अपेक्षाकृत कम राशि से म्युचुअल फंड में निवेश करने की आजादी देता है। SIP को बेहतर समझने के लिये आपको धन के जुङते रहने की शक्ति (power of compounding) को समझना जरूरी है।एसआईपी में 500 या 1,000 रूपये के नियमित निवेश से बड़ी पूँजी तैयार हो जाती है।SIP के माध्यम से छोटी छोटी बचत करना शुरुआत में भले ही आकर्षक न लगे किंतु लम्बे निवेश काल में कंपाउंडिंग के प्रभाव से ये उच्च प्रतिलाभ देता है|उदाहरण के तौर पर यदि साधारण ब्याज दरों पर मात्र 1,000 रूपये प्रति माह का एक SIP का धन 9% की दर से 10 वर्षों में बढकर 6.69 लाख रूपये, 30 साल में 17.38 लाख रूपये और 40 साल में 44.20 लाख तक हो सकता है।इस आधार पर बाजार कि उच्चतम दशाओं में प्रतिलाभ का आकलन आप कर सकते हैं| कंपाउंडिंग के प्रभाव से सुसज्जित एसआईपी लम्बे निवेश की अवधि में बड़ी एवं  सुरक्षित पूँजी का निर्माण करती है|अतः निवेश जितना पहले शुरू करेंगे उसके उतने ही बड़े प्रतिलाभ प्राप्त होंगे|