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म्युचुअल फंड से आय के विकल्प क्या हैं?

निवेशक का लक्ष्य होता है अपने निवेश से प्रतिलाभ अर्जित करना

निवेश से जुड़े निर्णय लेना आसान काम  नहीं है|बाजार में मौजूद म्यूचुअल फंड की एक जैसी कई स्कीमें कई बार आपके निर्णय को दुरूह बना देते हैं|बाजार में आय आधारित अनेकों योजनाएं प्रचलन में हैं|इनमे से आपके लिए कौन सी बेहतर है,इसके लिए आपको अपने निवेश के लक्ष्यों को समझना बहुत जरूरी है|साधारण सी बात है हर निवेशक का लक्ष्य होता है अपने निवेश से प्रतिलाभ अर्जित करना|ये प्रतिलाभ या रिटर्न कैसे प्राप्त करना है ये निवेशक का चुनाव होता है|उदाहरण के तौर पर समझें तो कई निवेशक अपने निवेश से मासिक आय चाहते हैं तो कई निवेशकों के बड़े वित्तीय लक्ष्य होते हैं|भविष्य की योजनाओं के लिए दीर्घकालिक निवेश सर्वोत्तम होता है|हालांकि हर निवेशक की परिस्थितियां और प्राथमिकताएँ अलग अलग होती हैं|आइये जानते हैं म्युचुअल फंड से जुड़े आय विकल्पों को |

म्यूचुअल फण्ड की कार्य प्रणाली:

म्यूचुअल फण्ड निवेशकों के पारिभाषित लक्ष्य तथा निवेशकों की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत निवेश के रूप में धन संग्रह करते हैं ।इस एकत्र धन का प्रयोग  विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों में निवेश किया जाता है। फंड के वित्तीय  लक्ष्य प्रस्ताव पत्र में उल्लेखित होते हैं। यह कोष निवेश में दो तरह से मूल्य जोड़ता है। अर्जित की गई आय तथा बिक्री के द्वारा अन्य पूंजी के संपादन द्वारा। इसे यूनिटधारकों को उनके पास उपलब्ध इकाइयों के आधार पर बांटा जाता है।

निवेश लक्ष्य के अनुसार आय विकल्प:

जैसा कि हम सभी जानते हैं हर निवेश का लक्ष्य होता है आय अर्जित करना|आय के आधार पर म्युचुअल फंड को निम्न प्रकारों में बांटा जा सकता है|  

  • वृद्धि कोष: जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि इसका फंड का उद्देश्य निवेशित पूँजी में वृद्धि है| इसका प्रमुख लक्ष्य मध्य अवधि से लंबी अवधि तक पूंजी का अभिमूल्यन है। इस तरह की योजनाएं सामान्यत: इक्विटी आधारित योजनाओं  में ज्यादातर निवेश की जाती हैं। वृद्धि कोष योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श होती हैं जो लंबा दृष्टिकोण रखते हैं और वृद्धि को लंबे समय के अनुसार देखते हैं।लम्बे निवेश के कारण इनसे होने वाला लाभ भी अधिक होता है|
  • आय कोष : इस प्रकार के फंड का  मकसद निवेशकों को नियिमत तथा स्थिर आय प्रदान करना होता है। इस तरह की योजनाओं में निवेश को  सामान्यत: स्थाई प्रतिभूतियों, बांड, कापोरेट ऋण पत्र तथा सरकारी प्रतिभूतियों में किया जाता है।आय कोष पूंजी स्थिरता और नियिमत आय के लिए आदर्श होता है।
  • संतुलन कोष:इन म्युचुअल फंड योजनाओं में संतुलन को प्रमुखता दी जाती है|  इनमे वृद्धि तथा नियिमत आय दोनों लक्ष्यों का समाधान प्रस्तुत किया जाता है।यह योजना आवर्ती आधार पर अपनी आय को बांटता है। यह प्रतिभूति तथा आय आधारित प्रतिभूति में प्रस्ताव पत्र में दिए गए अनुपात के अनुसार निवेश करता है। यह योजना उन निवेशकों के लिए आदर्श होती है जिन्हें आय और मध्य वृद्धि दोनों की आवश्कता होती है।
  • मुद्रा बाजार कोष: इस मुद्रा बाजार कोष योजना का मकसद आसान तरलता, पूंजी का संरक्षण तथा मध्यम आय प्रदान करना होता है। ये योजनाएं सामान्यत: सुरक्षित कम अवधि के साधन जिनमें राजकोष बिल, जमा प्रमाणपत्र,व्यवसायिक पत्र,इंटर बैक कॉल मुद्रा में निवेश करती हैं। इन निवेश पर अदायगी बाजार में चल रहे ब्याज दर पर निर्भर करता है। ये योजना कार्पोरेट और उन निजी निवेशकों के लिए आदर्श है जो कम अवधि के लिए अतिरिक्त पूंजी को कहीं सुरिक्षत रखना चाहते हैं।

उपरोक्त आधारों पर देखें तो हम समझ सकते हैं म्युचुअल फंड निवेश का सरल माध्यम है|निवेश की सरलता के साथ ही साथ प्रतिलाभ भी हर निवेश की प्राथमिकता के अनुसार प्राप्त होता है|