Arthgyani
होम > म्यूच्यूअल फंड > म्यूचुअल फंड

म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने से पहले रखें इन बातों का ध्यान!

म्यूचुअल फंड से राशि निकालने से पहले नुकसान और फायदों के बारे में जानें

म्यूचुअल फंडों में लोग अपनी कमाई हुई राशि को जमा पूंजी के तौर पर निवेश करना उचित समझते हैं|म्यूचुअल फंड में हम निवेश ही इसलिए करते हैं कि जरूरत पड़ने जमा राशि सही ढंग से उपयोग में ली जाए|कभी कभी ऐसी परिस्थितियाँ सामने आ जाती हैं तो पैसे निकालने पड़ते हैं|उस दौरान सभी निवेशक अपनी जमा राशियों का सहारा लेना ही जरूरी समझते हैं| आज के दिनों में निवेशक फंडों में निवेश करने से पहले फंड्स मैनेजर की सलाह और SIP के जरिए निवेश करना करते हैं|

क्यूँ निकालनी है जमा राशि 

लेकिन आज हम जानेंगें कि म्यूचुअल फंड में निवेश की गयी राशि को निकालने के फैसले से पहले किन बातों को समझना जरूरी है|यदि आप जमा पूंजी को निकलना चाहते हैं तो होने वाले नुकसान और फायदों की पहचान जरूरी है| हांलांकि अभी के दिनों में सिप के जरिये किया गया निवेश का रिटर्न माइनस में चला गया है|इस वजह से तमाम निवेशकों को हो रहे नुकसान की वजह से राशि को निकालना पड़ रहा है|

म्यूचुअल फंड जमा राशि निकालने से पहले ध्यान रखें 

  • म्यूचुअल फंड से पैसा निकालने के बारे में सोच रहे हैं, तो ऐसा करने से पहले आपको उसके कई कारणों का पता लगाना जरूरी है|
  • ​सभी निवेशकों को पैसे निकलने से पहले निवेश पोर्टफोलियो में उनके शेयरों के एक्सपोजर का पता लगाना अनिवार्य है| इसका पता आप अपने फंड के एसेट एलोकेशन के जरिए जान सकते हैं|
  • यह जाना जरुरी है कि जमा राशि की एसेट वेल्यू क्या है|
  • क्यूँकि एसेट एलोकेशन का सीधा संबंध निवेश की अवधि से होता है|
  • अत: इक्विटी फंड से तभी पैसा निकालें, जब शेयरों की एसेट वेल्यू तय किये गए एलोकेशन की वेल्यू से अधिक है| यदि आपने इक्विटी फंडों में निवेश एसेट एलोकेशन प्लान के हिसाब वेल्यू कम है, उस दौरान निवेश राशि को निकालना उचित नहीं होगा|
  • आपको पैसों की जरूरत कब है या पड़ सकती है उसको ध्यान में रखकर पैसे निकालने का फैसला लें|

म्यूचुअल ​​फंड में कोई बदलाव या अच्छा प्रदर्शन नहीं है  

  • यदि आपके पसंदीदा फंड्स में कोई नया फंड जुड़ गया है, और उसकी स्कीमें पहले वाले फंड्स की स्कीमों से अलग है तो ऐसी परिस्थियों में आप पैसे निकालने का सोच सकते हैं|
  • फंड्स में नई इन्वेस्टमेंट स्कीम में बदलाव दीखता है और यह आगे भी परेशानी देगा, समय अवधि में बदलाव है, ऐसी परिस्थितियों में जमा राशि निकालना संभव है|
  • नई पोजिशनिंग से फंड का रिस्क प्रोफाइल बदल जाता है या फिर वह आपकी जरूरत से मेल नहीं खाता है और फंड का प्रदर्शन खराब है तो उसे बेच देना या पैसे निकाल लेना ठीक होता है|
  • आपके फंड ने कुछ वर्षों में बेंचमार्क इंडेक्स या प्रतिद्वंद्वी फंडों से कम प्रदर्शन किया हो ऐसे में उसे हटा देना सही निर्णय होता है|

फंड्स की समय अवधि और टारगेट लक्ष्य में बदलाव है 

  • कई बार ऐसा होता है कि निवेशकों ने जिस लक्ष्य को ध्यान में रखकर निवेश किया है, और वह बदल जाए तब आप पैसों को निकालने का सोच सकते हैं|
  • यदि आपका निवेश राशि के मैच्योर होने में 2-3 साल बाकी है|तब इक्विटी में अधिक निवेश से जोखिम की स्थिति बन सकती है| लक्ष्य के करीब होने पर अगर बाजार में बड़ी गिरावट आती है तो उसके लिए आपके पास पर्याप्त फंड नहीं बचेगा|
  • इन सभी कारणों को ध्यान में रखकर निवेशकों को निवेश की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है ऐसा भी हो सकता है कि एसेट एलोकेशन को भी बदलना पड़े|