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म्यूच्यूअल फंड कम्पनियां DHFL पर रियायत के मूड में नहीं है

कर्ज़दाता चाहते हैं कि कंपनी के प्रमोटर यानी वाधवान समूह फंड का इंतजाम करे।

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लि.(DHFL) पर कई म्यूचुअल फंड हाउसेज का कर्ज़ बकाया है। अब म्यूचुअल फंड्स कंपनी, DHFL के प्रमोटरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। ये कर्ज़दाता चाहते हैं कि कंपनी के प्रमोटर यानी वाधवान समूह फॉरेन्सिक जांच के आधार पर फंड का इंतजाम करे। म्यूचुअल फंड इस मुद्दे को रिजर्व बैंक द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय समिति के सामने उठाने वाले हैं।

DHFL पर  म्यूचुअल फंडों, बैंकों, बीमा कंपनियों, प्रोविडेंट फंडों और बॉन्ड धारकों का 84,000 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें से सिर्फ 10,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित लोन है। कंपनी की 39 फीसदी हिस्सेदारी वाधवान परिवार के पास है।

म्यूचुअल फंड्स कंपनी रियायत के मूड में नहीं है

  • DHFL पर कुल 84,000 करोड़ रुपये बकाया है।
  • सिर्फ 10,000 करोड़ रुपये का असुरक्षित लोन है।
  • 39 फीसदी हिस्सेदारी वाधवान परिवार के पास है।
  • बैंकों के पास DHFL के कर्ज की 50 फीसदी हिस्सेदारी है,
  • रिजर्व बैंक ने DHFL बोर्ड के सभी अधिकार ले लिए हैं।
  • म्यूचुअल फंड हाउस के सीईओ ने कहा, “हम बैंकों से फॉरेन्सिक ऑडिट रिपोर्ट की मांग करेंगे।
  • कर्जदाता चाहते हैं कि कंपनी के प्रमोटर यानि वाधवान परिवार फंड का इंतजाम करे।

इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार म्यूचुअल फंड हाउस के सीईओ ने कहा, “हम बैंकों से फॉरेन्सिक ऑडिट रिपोर्ट की मांग करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर हम अपने सुझाव देंगे, जिसमें किसी सरकारी एजेंसी से शिकायत भी की जा सकती है।”

कंपनी के खातों की जांच टॉप-4 ऑडिट फर्म्स में से एक ने की है। इनके सदस्यों में से एक भारतीय म्यूचुअल फंड संघ (एम्फी) के वरिष्ठ अधिकारी है। उन्होंने कहा, “हमें एक स्पष्ट, पारदर्शी और संतुलित समाधान योजना चाहिए।”

उन्होंने ये भी कहा कि फंड हाउस इस बात पर जोर देंगे कि रिटेल निवेशकों का पैसा देने के लिए DHFL को एडवांस से बचना चाहिए और सिर्फ निवेश मैच्योर होने पर ही उन्हें पैसा दिया जाना चाहिए। एक अन्य एएमसी के सीईओ ने कहा, “एम्फी के सीईओ एनएस वेंकटेश के समिति से जुड़ने से हमारा प्रतिनिधित्व बेहतर होगा। हम अपना पैसा वापस पाने का पूरा प्रयास करेंगे।”

बैंकों के पास DHFL के कर्ज की 50 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि म्यूचुअल फंडों के पास सिर्फ 5 फीसदी। म्यूचुअल फंड ज़्यादा हेयरकट यानी कर्ज में कटौती लेने के मूड में नहीं हैं। म्यूच्यूअल फंडों का कहना है कि, सिर्फ कर्ज़दारों पर ही बोझ का भार क्यों डाला जाना चाहिए।  इससे पहले म्यूचुअल फंडों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने DHFL बोर्ड के सभी अधिकार ले लिए हैं। कंपनी के प्रशासक के रूप में इंडियन ओवरसीज बैंक के पूर्व एमडी आर सुब्रमण्यनकुमार, साथ ही IDFC फर्स्ट बैंक के गैर कार्यकारी अध्यक्ष राजीव लाल और ICICI प्रूडेंशियल लाइफ के सीईओ एनएस कानन को चुना गया है।