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म्यूच्यूअल फंड निवेश में टैक्स पर रखें पैनी नज़र

टैक्स कैलकुलेशन नहीं किया तो हो सकती है परेशानी

अकसर हम इन्वेस्टमेंट या म्यूच्यूअल फंड को टैक्स सेविंग के रूप में देखते हैं। म्यूच्यूअल फंड में कई तरह की टैक्स छूट होती भी है, लेकिन अब इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स से छूट नहीं है।अब अगर आप एक साल के बाद अपने इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो आपको एक वित्त वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक के रिटर्न पर 10 फीसदी की दर से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स देना होगा। वहीं, आप एक साल से पहले अपने इक्विटी म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो गेंस को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस के रूप में माना जाता है। इस पर 15 फीसदी टैक्स लगता है।

इसी तरह छोटी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया डेट म्यूचुअल फंड में निवेश से मिलने वाले रिटर्न भी टैक्स के दायरे में आते हैं। यदि आप तीन साल से पहले अपने डेट म्यूचुअल फंड बेचते हैं, तो गेंस आपकी इनकम में जुड़ जाते हैं। फिर आपके लिए लागू इनकम स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है। जिसमे आपको अपने डेट म्यूचुअल फंड निवेश से होने वाले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर 30 फीसदी टैक्स का भुगतान करना होता है।

वहीँ अगर आप तीन वर्षों के बाद अपने डेट म्यूचुअल फंड निवेश बेचते हैं, तो आपके रिटर्न को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस के तौर पर कुल लाभ पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20 फीसदी टैक्स लगाया जाता है।

महत्वपूर्ण पक्ष

  1. यदि आप टैक्स का हिसाब नहीं रखेंगे, तो आप कुल कॉरपस में कमी का सामना कर सकते हैं।
  2. लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्यों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंडों में 10 फीसदी टैक्स अहम है।
  3. लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए निवेश करते हैं तो रिटर्न काफी ज़्यादा होंगे और इस तरह टैक्स में जाने वाली रकम का आकार भी बड़ा होगा।
  4. निकासी का प्लान इस तरह करें कि साल में एक लाख रुपये की एक्जेम्प्शन लिमिट का भरपूर उपयोग हो सके।
  5. किसी एक वित्त वर्ष में एक लाख रुपये से ज़्यादा के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 10 फीसदी की दर से टैक्स लगता है।