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रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान!

इनकम स्केल को ध्यान में रखकर रिटायरमेंट प्लानिंग करना उचित है

नौकरी करने वाला हर व्यक्ति अपने काम के साथ-साथ महीने पर मिलने वाली इनकम से कुछ बचत करने का प्रयास करते हैं। अक्सर लोग रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में सोचते हैं, लेकिन लोगों में इस प्लानिंग को लेकर किसी भी तरह का उत्साह नजर नहीं आता। क्यूँकि हर महीने मिल रही इनकम का शेष हिस्सा Retirement Planning में व्यक्ति निवेश करता है। इसमें निवेश के लिए अलग से कुछ इंसेटिव नहीं मिलता है। इसलिए रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

रिटायरमेंट प्लानिंग के स्त्रोत 

ज्यादातर रिटायर हुए लोगों के पास आय के दो ही स्रोत होते हैं- पेंशन प्लान और पहले से पैसे लगाए हुए निवेश विकल्पों जैसे कि म्युचुअल फंड्स, स्टॉक और शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट, आदि। इस प्रकार के कई स्त्रोत को बनाकर रखते हैं। सभी रिटायर व्यक्ति के लिए ये जरूरी है कि आय और खर्चों पर सतत नजर रखें।

लंबी अवधि वाले पोर्टफोलियो की परख 

रिटायरमेंट प्लानिंग में करते वक्त इक्विटी में निवेश का कुल पोर्टफोलियो का 25 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। क्यूँकि लंबी अवधि में विविधिकरण वाले पोर्टफोलियो में इन्वेस्ट से जोखिम कम होता है। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि एक ही तरह के निवेश विकल्प या फंड में पैसा बिल्कुल न लगाएं। क्योंकि इससे नुकसान हो सकता है। इसलिए सभी निवेश विकल्पों में नॉमिनी का नाम अवश्य दें। ऐसा नहीं करने से इन्वेस्ट की राशि फैमिली के किसी भी मेम्बर्स को नहीं मिल सकेगी।

रिटायरमेंट प्लानिंग के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  • रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखना अनिवार्य है, उसे नजरअंदाज करने से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। महंगाई को ध्यान में रखकर ही इसके फंड का अनुमान लगाया जा सकता है।
  • इस फंड के दौरान स्वास्थ्य से जुड़े खर्चों की गणना करना भी जरूरी है, ऐसा नहीं करने पर रिटायरमेंट फंडों का कुछ फायदा नहीं मिल सकेगा।
  • यदि आपने रिटायरमेंट प्लानिंग ठीक से नहीं की है तो एन्युटी रेट और बाजार के रेट दरों में गिरावट का सीधा असर इस प्लानिंग फंड पर पड़ता है।
  • इन फंडों से जरूरत पड़ने पर ही राशियों की निकासी करें, वरना जुटाए गए पैसों का समय आने पर उपयोग नहीं कर पाएंगें।
  • रिटायरमेंट फंड निश्चित करते वक्त लंबी उम्र का खतरा बना रहता है। आपने फंड कुछ उम्र सीमा निश्चित कर किया है, लेकिन आपकी उम्र बढ़ती है तो ऐसी परिस्थितयों में जमा की गई फंड राशि कम भी पड़ सकती है। जिससे बड़ा जोखिम उठाना पड़ सकता है।
  • रिटायरमेंट प्लानिंग करने से पहले अपने आपको शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत और सक्रीय रखें। क्यूँकि इन प्लानस पर महंगाई की अक्सर मार पड़ती है। एवं इनमें किए हुए निवेश पर लॉक-इन पीरियड भी होता है।
  • हमेंशा यह ख्याल रखिए कि टैक्स लगने वाले डेट निवेश विकल्पों में बड़ी पूंजी का कभी न लगाएं। इससे बड़े जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
  • यदि सुनिश्चित आय है तो कई पेंशन प्लान में इन्वेस्ट करने से बचें, और ज्यादा घाटे वाले विकल्पों में निवेश करने से होने वाले जोखिम से भी सतर्क रहें।