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रीयल एस्टेट और निर्यात को राहत पैकेज @ 70 हजार करोड़ रुपए

अवासीय परियोजनाओं की वित्तीय मदद के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का कोष

निर्माण के आखिरी चरण में पहुंच चुकी साफ सुथरी अवासीय परियोजनाओं को पूरा कराने में वित्तीय मदद के लिए 20 हजार करोड़ रुपये का कोष बनाया जाएगा। इसमें करीब 10 हजार करोड़ रुपये सरकार मुहैया कराएगी तथा इतनी ही राशि अन्य स्रोतों से जुटायी जाएगी। इस योजना लाभ उन्हीं परियोजनाओं को मिलेगा जो एनपीए घोषित नहीं हैं और न ही उनको रिण समाधान के लिए एनसीएलटी के सुपुर्द किया गया है। ये जानकारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने राजधानी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में दी।

वित्त मंत्री  ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिये शनिवार को बाजार प्रोत्साहन के उपायों की तीसरी किस्त की घोषणा की। इसके तहत रीयल एस्टेट तथा निर्यात क्षेत्रों को 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक की मदद देने की योजना है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार कम होकर छह साल के निचले स्तर पर आ गयी है। धन के अभाव में अंतिम चरण में अटकी आवासीय परियोजनाओं को वित्तीय सहायता कोष की मदद से करीब 3.5 लाख घर खरीदारों को लाभ मिलेगा। बता दें कि इससे पहले सरकार अर्थव्यवस्था में निवेश को गति देने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को अधिक उदार बनाने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के आपस में विलय के जरिए बड़े बैंक स्थापित करने के भी फैसले कर चुकी है।

निर्मला ने बताया कि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जनवरी, 2020 से एक नई योजना ‘निर्यात उत्पादों पर करों एवं शुल्कों से छूट’ (रोडीटीईपी) अमल में लाई जाएगी। यह योजना वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात संवर्धन की योजना (MEIS) की जगह लेगी। सीतारमण ने कहा कि नई योजना से निर्यातकों को पहले के मुकाबले ज्यादा राहत मिलने के साथ ही सरकारी राजस्व पर भी 50 हजार करोड़ रुपए का प्रभाव पड़ सकता है।

गौरतलब है कि सरकार निर्यातकों को 40-45 हजार करोड़ रुपए के शुल्कों/करों का रिफंड मुहैया करा रही है।इसके साथ ही निर्यात ऋण गारंटी निगम (ECGC) निर्यात ऋण बीमा योजना का दायरे का भी विस्तार किया जा रहा है। सरकार के इस कदम पर सालाना 1,700 करोड़ रुपए की लागत लगेगी।

सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और औद्योगिक उत्पादन में सुधार के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं। मुद्रास्फीति 4 फीसदी के लक्ष्य से अच्छी खासी नीचे है।उन्होंने कहा कि ‘निर्यातकों के लिए ऋण’ को ‘प्राथमिकता क्षेत्र के लिए ऋण’ का दर्जा देने का प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक के विचाराधीन है। इससे निर्यातकों को 36,000 करोड़ रुपए से लेकर 68,000 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त वित्त लाभ मिलेगा।

5 फीसदी की वृद्धि दर पर सीतारमण ने कहा, ‘यह एक तिमाही की बात है लेकिन इसके बाद निश्चित ही हम इस पर गौर करने वाले हैं। जो मैंने बजट में कहा उसके साथ इसका मिलान करने वाले हैं और हम यह तय करेंगे कि हम किस जगह और किस स्तर पर हैं.’ उन्होंने स्वीकार किया कि अभी आर्थिक वृद्धि दर की रफ्तार बजट के पूर्वानुमान से भिन्न है।