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‘Rating Shopping’ के लिए RBI ने लगाई एजेंसीयों को फटकार

सेबी पहले ही लगा चूका है 25 लाख का जुर्माना

पूंजी बाजार नियामक SEBI द्वारा प्रमुख रेटिंग एजेंसियों पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाने के बाद अब रिजर्व बैंक ने भी इन एजेंसियों को आड़े हाथों लिया है| खराब रेटिंग पाने वाली कंपनियों को तीन महीने के भीतर अच्छी रेटिंग दिये जाने में रेटिंग एजेंसियों की भूमिका को लेकर रिजर्व बैंक ने उनकी कड़ी आलोचना की है|

रेटिंग शॉपिंग क्या है?

ऐसा देखने को मिला है कि कुछ कंपनियों ने खराब रेटिंग मिलने के तीन महीने के भीतर किसी अन्य रेटिंग एजेंसी से बेहतर रेटिंग हासिल कर ली और उसके आधार पर दीर्घावधि ऋण ले लिये| इस प्रक्रिया को ‘रेटिंग शॉपिंग’ कहा जाता है|

रिजर्व बैंक ने शुक्रवार (27 दिसंबर) को जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के 25वें संस्करण में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की सीमित रेटिंग के आधार पर बैंकों से दीर्घकालिक ऋण लेने को लेकर कंपनियों को भी चेतावनी दी है| क्रेडिट रेटिंग कंपनियों की सांकेतिक रेटिंग, जो कि बैंकों और निवेशकों के पास उपलब्ध नहीं है, उसके आधार पर दीर्घकालिक कर्ज लेने को लेकर यह चेतावनी दी गई|

2008 के मंदी के समय भी उठा था प्रश्न

रिपोर्ट में कहा गया कि ज्यादातर रेटिंग शॉपिंग ‘BBB’ या इससे निम्न रेटिंग वाले वित्तीय साधनों में की गई| रिजर्व बैंक ने रेटिंग शॉपिंग के मामलों की गहन जांच करने की बात की है| क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के लिये भी उनकी खराब नीतियों के कारण जिम्मेदार माना जाता है| उस समय कुछ कंपनियों को बहुत अच्छी रेटिंग प्राप्त थी मगर मंदी में वे थोडा भी आर्थिक दबाव नहीं बर्दास्त कर सकी| उस समय भी इन रेटिंग एजेंसीयों पर प्रश्न उठाए गए थे, मगर  कोई कार्रवाई नहीं हुई थी|

इंडिया रेटिंग्स, इक्रा और केयर जैसी रेटिंग एजेंसियां है कटघरे में

न्यूज़ एजेंसी भाषा की रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर देखें तो जब सितंबर 2018 में IL&F के ऋण किस्तों के भुगतान में चूक का मामला सामने आया था, उसके कुछ ही दिन पहले इंडिया रेटिंग्स, इक्रा और केयर जैसी रेटिंग एजेंसियों ने उसके ऋण दस्तावेजों को AAA /AA+ रेटिंग दी थी| इसी मामले में सेबी ने पिछले शुक्रवार (20 दिसंबर) को इन एजेंसियों पर 25-25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है|

रिजर्व बैंक (RBI) ने रिपोर्ट में सेबी के उन निष्कर्षों का भी जिक्र किया जिनमें ऐसे मामलों का जिक्र था जब रेटिंग एजेंसियों ने बिना लिखित करार के सीमित रेटिंग दी थी लेकिन अपनी वेबसाइट पर इनका उल्लेख नहीं किया| इससे रेटिंग शॉपिंग को पकड़ पाना मुश्किल हो गया|

रेटिंग एजेंसीयों का काम किसी भी कंपनी के बही-खातों का सही मुयायना करके उसके आधार पर उनके रेटिंग को आंकना और देना है| बड़े स्तर पर बैंक से लेकर बड़े-बड़े वित्तीय संस्थान रेटिंग एजेंसीयों के आंकड़ो/रेटिंग को बहुत महत्व देते हैं| वो रेटिंग एजेंसी पर विश्वास करके चलते हैं| मगर जब कोई रेटिंग एजेंसी किसी लालच में आकर गलत रेटिंग देने का कार्य करती हैं तो धोखाधड़ी का बड़ा मामला बनता है| यह ऐसे है जैसे किसी अयोग्य को योग्य का हक़ छीन कर दे देना| यह ऐसे है जैसे किसी चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) के हस्ताक्षर के बाद अगर किसी व्यक्ति या फर्म के दस्तावेज गलत पाए जाते हैं तो चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) पर भी कार्रवाई की जाती है| इसी तर्ज पर पहले सेबी ने रेटिंग एजेंसीयों को जुर्माना लगाया और अब RBI ने फटकार लगाईं है| यह सिर्फ रेटिंग का प्रश्न नहीं है, अपितु यह अपनी विश्वसनीयता को बेचने का मामला है|