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रोड टैक्स और टोल टैक्स में क्या अंतर है?

कर के माध्यम से सरकार सडक की देखरेख करती है

रोड टैक्स और टोल टैक्स के कारण अक्सर ही जनता असहज महसूस करती है|कर किसी भी व्यस्था के विकास के लिए एक आवश्यक अवधारणा है|कर के माध्यम से सरकारें व्यवस्था की देखरेख करती हैं| किंतु कई बार कुछ कर जनता को अरुचिकर लगते हैं|ऐसे ही एक नागरिक का सवाल है, रोड टैक्स भरने के बाद हम पर अतिरिक्त Toll Tax क्यों लगाया जाता है?ऐसे ही कुछ सवाल अक्सर ही हम सभी के मन में उठते हैं|आज जानते हैं इन दोनों करों में अंतर:

रोड टैक्स क्या है? (Road Tax)

जब हम कोई भी गाड़ी खरीदने जाते है है तो गाड़ी के शोरूम से बाहर आने से पहले ही रोड टैक्स चुकाना पड़ता है|गाड़ियों के अनुसार रोड टैक्स अलग अलग होता है| एबुलेंस, बसें, थ्री-व्हीलर, 13 सीटर मेटाडोर और टैक्सियों का Road Tax इनकी कीमत का 6 प्रतिशत होता है।ये रोड टैक्स आपको इस लिए देना होता है कि आप गाड़ी को रोड पर चलाएंगे तो रोड टूटेगी भी उसकी मरम्मत कि एवज में ये टैक्स देना पड़ता है|इस कर के माध्यम से सरकार सडक की देखरेख करती है|

क्या है टोल टैक्स? (Toll Tax)

मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (MoRTH’s) 5 दिसंबर 2008 से लागू हुए नियमों के तहत टोल वसूली की परमीशन देती है। टोल प्लाजा से गुजरने वाली गाड़ियों से सिर्फ तीन तरह के चार्ज ही लिए जाते हैं । सिंगल, मल्टीपल/डबल और मंथली पास। टोल प्लाजा से वाहन क्रॉस होते ही सिंगल ट्रिप वाली पर्ची की वैधता खत्म हो जाती है। वहीं, मल्टीपल ट्रिप की पर्ची 24 घंटे के अंदर आने-जाने के लिए होती है। मल्टीपल पर्ची का किराया सिंगल ट्रिप से करीब डेढ़ गुना होता है। आला दर्जे की सड़क के लिए टोल वसूली पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का नमूना है, निजी कंपनियां आला दर्जे के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में निवेश करती हैं। बदले में उन्हें टोल वसूली का हक मिलता है। सिर्फ चार लेन या उससे ज्यादा लेन की सड़कों पर ही ये नीति लागू है। सरकार ने सड़क बनाने के लिए बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर नीति को अपनाया है।इस नीति के तहत सड़क बनाने वाला निवेशक 30 साल तक टोल वसूल सकता है। प्रोजेक्ट शुरू होते ही निवेश करने वाली कम्पनी टोल वसूलने का हक पा जाता है। 30 साल तक वसूली के बाद निवेशक सड़क सरकार के हवाले कर देता है। नेशनल हाईवे फीस नियम 2008 के संशोधनों के तहत टोल की रकम तय होती है।

उपरोक्त आधारों पर देखें तो रोड टैक्स प्रायः एक ही बार देना पड़ता है,जबकि टोल टैक्स उपयोग एवं सफर के अनुसार हर बार चुकाना पड़ता है|देश  के सतत विकास में सुव्यवस्थित एवं समन्वित यातायात प्रणाली एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पिछले कुछ वर्षों में यातायात के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास देखने को मिला है, जिसके पश्चात देश के सुदूर क्षेत्रों तक यातायात सेवाओं का विस्तार हुआ है एवं लोगों को इसका लाभ भी प्राप्त हुआ है।अतः इन सेवाओं के विस्तार को बढाने के लिए ये कर लगाये जाते हैं| हर राज्य , क्षेत्र में इसका दर अलग होता है और VIP तथा कुछ मुख्य अधिकारियों को छोड़कर  हर वो  नागरिक जो सड़को या राजमार्गो का इस्तेमाल करता है, उसे ये कर चुकाना पड़ता है।  राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क की नीतियों के अंतर्गत यातायात कर / टोल टैक्स ( Toll Tax ) के दर में हर साल बदलाव किया जाता है और हर वर्ष १ अप्रैल को इससे जुड़े नए नियम और दर लागू किए जाते हैं।