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वोडाफोन आइडिया को 50,921 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा

वोडाफोन का भारत में निवेश बरकरार रहेगा

देश की प्रमुख टेलीकाम कम्पनी वोडाफोन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं| भारत के कारोबार समेटने की कयासों के बीच कंपनी ने अपना नुकसान दर्शाया है| समायोजित सकल आय (एजीआर) पर उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बकाया सांविधिक देनदारियों के लिए भारी खर्च के प्रावधान के चलते वोडाफोन आइडिया ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 50,921 करोड़ रुपये का नुकसान दिखाया है| कंपनी के गुरूवार को दिए आधिकारिक बयान के अनुसार वो न्यायालय के फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने जा रही है|

बता दें कंपनी ने अपने बयान में यह भी कहा है कि उसका कारोबार चल पाना सरकार की ओर से राहत और कानूनी मसलों के सकारात्मक समाधान पर निर्भर करेगा| कंपनी ने यह भी  कहा कि एजीआर पर न्यायालय के फैसले का दूरसंचार उद्योग की वित्तीय स्थिति पर बड़े प्रभाव पड़ेंगे|बीते  सितंबर 2019 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने कुल 50,921 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दिखाया है|जबकि पिछले वित्त वर्ष इसी अवधि में कंपनी को 4,874 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था| आलोच्य तिमाही में कंपनी की आय 42 प्रतिशत बढ़कर 11,146.4 करोड़ रुपये रही है|काबिलेगौर है कि  उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद कंपनी को सरकार की बकाया देनदारियों के लिए 44,150 करोड़ रुपये चुकाने होंगे| कंपनी ने 2019-20 की दूसरी तिमाही में इसके लिए 25,680 करोड़ रुपये का भारी भरकम प्रावधान किया है|

न्यायालय ने सरकार की परिभाषा को सही माना था:

गौरतलब है कि पिछले महीने न्यायालय ने एजीआर की सरकार द्वारा तय परिभाषा को सही माना था|जिसके अनुसार कंपनियों की दूरसंचार सेवाओं के इतर कारोबार से प्राप्त आय को भी उनकी समायोजित सकल आय का हिस्सा मान लिया गया है| इसके चलते कंपनियों पर स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और राजस्व में सरकार की हिस्सेदारी जैसी मदों में देनदारी अचानक बढ़ गई है| दूरसंचार विभाग के नवीनतम आकलन के मुताबिक भारती एयरटेल पर सरकार का पुराना सांविधिक बकाया 62,187 करोड़ रुपये और वोडाफोन आइडिया पर 54,184 करोड़ रुपये बनता है|विदित हो कि  रिलायंस जियो के बाजार में प्रवेश करने के बाद से दूरसंचार कंपनियां वित्तीय संकट का सामना कर रही हैं और उन पर अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है|

वोडाफोन का भारत में निवेश बरकरार रहेगा:

वोडाफोन ग्रुप के सीईओ निक रीड के भारत में कारोबारी अनिश्चितताओं वाले बयान पर काफी चर्चाएँ हुई थी| इस बयान पर सरकार की नाराजगी को ध्यान में रखकर रीड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सफाई दी है|इस पत्र में उन्होंने कहा कि मेरा बयान गलत तरीके से पेश किया गया, वोडाफोन का भारत में निवेश बरकरार रहेगा| इससे पहले रीड ने कहा था कि एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वोडाफोन-आइडिया समेत भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की स्थिति गंभीर हो गई है। वोडाफोन-आइडिया को जरूरतों के मुताबिक नकदी जुटाने के संबंध में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। कंपनी एजीआर के भुगतान में ब्याज और जुर्माने से राहत देने की सरकार से मांग कर रही है।