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शत्रु संपत्ति से 1 लाख करोड़ रूपये जुटाएगी मोदी सरकार

9400 ऐसी संपत्तियों को चिन्हित किया गया है

देश में मौजूद शत्रु संपत्ति के विक्रय से 1 लाख करोड़ रुपये जुटायेगी मोदी सरकार। सरकार द्वारा प्रस्तावित विभिन्न परियोजनाओं को पूरा करने लिए ये राशि एक बड़ी मदद के तौर पर देखी जा रही है|सरकार ने देश में 9400 ऐसी संपत्तियों को चिन्हित किया है|केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंत्रियों का समूह (जीओएम) 9,400 से अधिक शत्रु संपत्तियों के विक्रय को अमली जामा पहनायेगा। मंत्री समूह में शाह के अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में है सबसे अधिक शत्रु संपत्ति:

पीटीआई में प्रकाशित खबर के अनुसार, देश में पाकिस्तान के नागरिकों की करीब 9280 और चीन के नागरिकों की 126 संपत्तियां हैं।इनमें पाकिस्तान के नागरिकों की सर्वाधिक 4991 संपत्तियां यूपी में हैं। जबकि बंगाल व दिल्ली में क्रमशः 2735 और 487 संपत्तियां हैं|इसके अलावा चीन जा चुके लोगों की सबसे अधिक 57 संपत्तियां मेघालय,29 बंगाल और 7 असम में हैं। ये जानकारी 2018 में तत्कालीन मंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में दी थी|शत्रु संपत्ति के विक्रय के लिए मंत्री समूह के अलावा दो और भी उच्च स्तरीय समितियों का गठन किया जायेगा|जिनकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव राजीव गौबा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला करेंगे।

क्या है शत्रु संपत्ति:

शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 दरअसल भारतीय संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है| इसके अनुसार इस प्रकार की संपत्तियों पर भारत सरकार का अधिकार होगा| ये अधिनियम 1965 में भारत पकिस्तान युद्ध के बाद पारित किया गया था| इसके अनुसार भारत-पाक बंटवारे के समय पकिस्तान जाने वाले लोगों की संपत्ति को शत्रु संपत्ति घोषित किया गया था| ऐसी ही प्रक्रिया 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों की संपत्ति के साथ भी किया गया | 2018 में मोदी सरकार द्वारा इस अधिनियम में संशोधन के बाद देश के बंटवारे के दौरान देश छोड़कर दूसरे देशों यानी पाकिस्तान और चीन में बसे लोगों के उत्तराधिकारियों का अब इस संपत्ति पर कोई दावा नहीं रह गया है| इन संपत्तियों में जमीन, घर, खेत के अलावा बैंक बैलेंस, शेयर और प्रोविडेंट फंड भी शामिल है।