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सब्जियों ने लगाया महंगाई में तड़का

महंगाई बेलगाम औद्योगिक उत्पादन में सुधार

आर्थिक सुस्ती और गिरती जीडीपी से बेहाल मोदी सरकार को महंगाई के मोर्चे से भी झटका लगा है|प्याज एवं अन्य खाद्य की बढ़ी हुई कीमतों ने महंगाई की दर को बढ़ा दिया है| बीते नवंबर महीने में खुदरा महंगाई दर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है| सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार  नवंबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 4.62 फीसदी से बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई है|हालांकि सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन दर में आये सुधार ने सरकार को थोड़ी राहत जरूर दी है|

सब्जियों ने लगाया महंगाई में तड़का:

जी हां महंगाई की दर में हुई वृद्धि में सब्जियां भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं|देश भे में चल रहे प्याज संकट के बीच अन्य सब्जियों की कीमतों में भी बढ़त नजर आने लगी है| आंकड़ों के अनुसार प्याज, टमाटर और अन्य सब्जियों की कीमतों में इजाफा होने के कारण नवंबर में महंगाई दर ये उछाल देखने को मिला है| सब्जियों की महंगाई नवंबर में बढ़कर 36 फीसदी हो गई है जो एक महीना पहले 26 फीसदी थी| जबकि प्याज का राज अब भी बरकरार है| सितंबर में प्याज की कीमतों में 45.3 फीसदी इजाफा हुआ था|जबकि अक्टूबर में प्याज के दाम 19.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी|

खाद्य पदार्थों की कीमतों में 10.01% की वृद्धि:

नवंबर में शहरी और ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की चीजों के दाम 10.01 फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है| बता दें हेडलाइन CPI में फूड की हिस्सेदारी 45.9 फीसदी है| अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति 4.62 फीसदी थी|जबकि सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 3.99 फीसदी थी|नवंबर में खुदरा महंगाई दर तीन साल में सबसे ऊपर पहुंच गई है|इससे पहले जुलाई 2016 में खुदरा महंगाई दर 6.07 फीसदी थी|

औद्योगिक उत्पादन दर में थोड़ी राहत:

महंगाई और मंदी से बेहाल भारतीय अर्थव्यवस्था को औद्योगिक उत्पादन दर के आंकड़ों से थोड़ी राहत अवश्य मिली है| औद्योगिक उत्पादन दर -4.3 फीसदी के मुकाबले अक्टूबर में -3.8 फीसदी रही है|हालांकि अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य के नजरिये से इन आंकड़ों में अभी और सुधार की आवश्यकता है|

सरकार के प्रयास:

खुदरा महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार प्रयासरत है|महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने मीडियम टर्म इनफ्लेशन टारगेट तय किया है|जिसके तहत मार्च 2021 तक महंगाई दर की वृद्धि को 4 फीसदी बनाए रखने के प्रयास किये जायेंगे| इस बीच अर्थव्यवस्था की सुस्ती दूर करने के लिए रिजर्व बैंक लगातार रेपो रेट में कटौती कर रहा है| इस वर्ष RBI ने रेपो रेट में 1.35 % की कटौती की है|