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सरकारी हो या प्राइवेट जॉब, एक डेट पर मिलेगी सभी को सैलरी

सरकार भी है इसे जल्द से जल्द लाने की तैयारी में

नौकरीपेशा लोगों की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ‘One Nation, One Pay Day’(एक राष्ट्र, एक दिन पेमेंट) क़ानून को जल्द  लाने के लिए कृतसंकल्प है| सरकार ने इसके लिए ठोस प्रयास भी शुरू कर दिया है, और इसे जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कमर कस चुकी है| अगर यह लागू होता है तो कामगारों के लिए एक बहुत बड़ा राहत भरा कदम होगा| ‘वन नेशन, वन पे डे’ के लागू होने के बाद संगठित क्षेत्र के सभी कर्मचारियों को एक ही दिन सैलरी मिलेगी|  अभी तक सैलरी मिलने के लिए कोई तय सिस्‍टम तय नहीं है,और इसका फायदा उठाते हुए बहुत से नियोक्ता मनमानी करते है|

प्रधानमंत्री इसे जल्द लागू करना चाहते हैं  

केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने इस बात का उल्लेख न्यूज़ एजेंसी PTI( प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया) से बात करते हुए कही| PTI से बात करते हुए उन्होंने कहा,’पूरे देश में एक समान व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके तहत हर सेक्टर में सभी वर्ग के कर्मचारियों और मजदूरों को एक दिन सैलरी मिले| प्रधानमंत्री खुद चाहते हैं की इस बाबत कानून जल्द से जल्द तैयार होकर संसद से पास हो जाए|’

वेतननिर्भर कर्मचारियों को मिलेगी बड़ी राहत 

आने वाले दिनों में नौकरीपेशा लोगों को सैलरी मिलने का सिस्‍टम बदल सकता है| जब सबको साथ मिलेगी सैलरी तो कर्मचारियों को अपने महीने भर की आर्थिक प्लानिंग करने में बहुत आसानी होगी और कोई भी नियोक्ता कर्मचरियों की सैलरी रोक कर ब्लैकमेल नहीं कर पाएंगे| जब यह क़ानून लागू होगा तो संगठित व सरकारी दोनों तरह के कर्मचारियों को एक साथ, एक तारीख को अपना वेतन प्राप्त हो जाएगा| 

40 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों को होगा फायदा 

इस क़ानून के लागू होने से लगभग 33 लाख सरकारी कर्मचारी और संगठित क्षेत्र के 40 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी लाभान्वित होंगे| वर्तमान में कंपनियां या संस्‍था अपने कर्मचारियों को अपनी सुविधा के हिसाब से महीने के किसी भी दिन सैलरी दे देती हैं| अधिकतर कर्मचारियों को महीने की 30 या 31 तारीख के अलावा 7 और 15 तारीख को भी सैलरी मिलती है|

मनमानी पर लगेगी रोक

अभी तक प्राइवेट सेक्टर में वेतन के तारीख़ निर्धारण को लेकर कोई क़ानून नहीं है जिससे प्राइवेट कंपनियां बहाने बना कर 7 से 10 दिनों तक कर्मचारियों के वेतन को रोक कर अपने पास रखती और गलत तरीके से व्याज कमाती है| कुछ कंपनियां तो ऐसी भी जो महीना पूरा हो जाने के 15 दिनों से लेकर एक महीने तक वेतन रोके रखती है| ऐसा करने के पीछे कंपनियों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों का आर्थिक शोषण करना, व्याज कमाना और काम छोड़ने पर वेतन लटका कर परेशान करना होता है|

जुर्माने का भी हो सकता है प्रावधान 

सूत्रों की माने तो इस क़ानून में देरी से वेतन के भुगतान करने पर नियोक्ताओं के ऊपर आर्थिक दंड का प्रावधान भी होने की संभावना है| यह सैलरी दिवस के बाद के अतिरिक्त दिनों पर व्याज सहित भुगतान के रूप में हो सकता है, या फिर एक फिक्स जुर्माने के तौर पर भी सरकार एक निश्चित रकम वसूल सकती हैं| 

13 कानूनों को मिलाकर बनेगा एक क़ानून 

इसके साथ ही सरकार यूनिफॉर्म मिनिमम वेज प्रोग्राम को लागू करने की दिशा में भी काम कर रही है| सरकार व्यावसायिक सुरक्षा, हेल्थ ऐंड वर्किंग कंडीशन कोड (Occupational Safety and Health-OSH), कोड ऑन वेजेज को लागू की भी तैयारी की जारी है| OSH को लोकसभा में 23 जुलाई 2019 को पेश किया गया था| वेतन के दिवस निश्चित करने के साथ इस कोड को 13 लेबर लॉ को मिलाकर तैयार किया जा रहा है| इसके अलावा इसमें कई और प्रावधानों को भी जोड़ा गया है| उदाहरण के लिए हर कर्मचारी को अपॉइंटमेंट लेटर देना अनिवार्य करना और सालाना फ्री मेडिकल चेकअप जैसे प्रावधानों को इस कोड में जोड़ा गया है|

साबित होगी मिल का पत्थर

वायर एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस क़ानून के आगू होने से यह श्रम कानूनों में बदलाव की मिल का पत्थर साबित होगी| केंद्रीय मंत्री के अनुसार 44 से ज्यादा पुराने हो चुके श्रम कानूनों पर समीक्षा की जा रही जिससे ‘One Nation, One Pay Day’ के अलावा कर्मचरियों को स्वास्थ्य, सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, पेंसन आदि के प्रावधानों में भी लाभ मिलेंगे|

 इस संहिता के लागू होने से कामगारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाज की स्थिति पर 13 केंद्रीय क़ानून एक में समाहित हो जाएंगे| सरकार की यह पहल संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए राहत देने वाली होगी और इससे उनके आजीवका स्तर में सुधार आएगा|