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सरकार द्वारा की गई ‘ई असेसमेंट सेंटर’ की शुरुआत

‘ई असेसमेंट सेंटर’ का मुख्यालय दिल्ली में स्थापित है

भारत देश में लगभग 6.68 करोड़ लोग इनकम टैक्स रिटर्न भरते है| टैक्सपेयर्स (करदाता) जब इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं तो कई बार कुछ जानकारीयां अधूरी रह जाने से बहुत परेशानी होती है। टैक्स डिपार्टमेंट के चक्कर काटने पड़ते जाते हैं| जानकारी जब तक अपडेट नहीं होती तब तक आईटी विभाग से नोटिस आते रहते हैं| लेकिन अब ऐसा नहीं होगा|

बता दें, आयकर विभाग से जुड़ी हर जानकारियों को अपडेट करने और  के लिए अधिकरियोन से बात करने  के लिए सरकार द्वारा ई असेसमेंट सेंटर’ योजना शुरू गई है| इस योजना के तहत आईटी नोटिस या फिर कम्युनिकेशन के लिए आपको आयकर विभाग के चक्कर काटने या अधिकारियों से दरख्वास्त करने से बचा जायेगा| ई असेसमेंट सेंटर’(NeAC) का मुख्यालय (हैड ऑफिस) दिल्ली में स्थापित किया गया है|  इसके अलावा देश के कई राज्यों मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में रीजनल सेंटर होंगे| इस तरह ये योजना पूरे देश में लागू हो गई है|

जानिये ‘ई असेसमेंट सेंटर’ की सुविधाओं से क्या फायदे होंगें

  1. इस योजना के तहत ऑनलाइन कम्युनिकेशन काफी आसान रहेगा|
  2. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) को आपके बारे में कुछ भी जानकारी हासिल करनी है तो कागजी कार्रवाई के बजाय ऑनलाइन कम्युनिकेशन करेगा|
  3. आयकर विभाग का डायरेक्ट रजिस्तार्ड ईमेल या फोन पर संपर्क करेगा|
  4. National e-Assessment Center एक सिंगल एजेंसी रहगी जो करदाता (taxpayer) से संपर्क रखने में नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगी|
  5. इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए टैक्स विभाग ने 2600 से ज्यादा ऑफिसर्स कार्य करेंगे| जिससे टैक्स विभाग के काम में पारदर्शिता बढ़ेगी|
  6. आयकर विभाग के चक्कर काटने से बचा जायेगा|

गौरतलब, वित्त मंत्रालय के राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय के मुताबिक, इस योजना से करदाता को घर बैठे संपर्क करने की सुविधा मिलेगी| पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस योजना में करीब 60,000 मामले शामिल किए गए हैं| सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज़ (CBDT) के चेयरमैन पीसी मोदी के मुताबिक, अभी चल रहे असेसमेंट ईयर 2018-19 से ही इसकी शुरुआत हो गई है| करदाता से नई तकनीकी से संपर्क होगा, उन्हें ऑफिस आने की ज़रुरत नहीं है| कुछ विशेष केस में जहां उन्हें करदाता की ज़रुरत लग सकती है या थर्ड पार्टी मामला हो तभी केस वेरीफिकेशन यूनिट के पास जाएगा| केस के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था होगी|