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सरकार ने काला धन वालों की जानकारी देने से किया इनकार

RTI के तहत मांगी गई थी जानकारी, सरकार ने दिया गोपनीयता निति का हवाला

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने स्विस बैंक (Swiss Bank) के खातों की जानकारी देने से मना कर दिया है| मंत्रालय ने गोपनीयता प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि भारत और स्विटजरलैंड के बीच की गई कर संधि के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता है| बता दें कि अक्टूबर के पहले हफ्ते में स्विस बैंक में भारतीय खाता धारकों के ब्यौरे की पहली लिस्ट  सरकार को मिली थी| यह सूचना भारत को स्विटजरलैंड सरकार ने ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) की नई व्यवस्था के तहत प्रदान की थी|

FTA ने भागीदार देशों को 31 लाख वित्तीय खातों की सूचना साझा की थी| वहीं स्विट्जरलैंड को भी करीब 24 लाख खातों की जानकारी प्राप्त हुई है| साझा की गई सूचना के तहत खाताधारक की पहचान, खाता और वित्तीय सूचना शामिल है| इनमें निवासी के देश, नाम, पते और कर पहचान नंबर के साथ वित्तीय संस्थान, खाते में शेष और पूंजीगत आय का ब्योरा भी दिया गया है|

75 देशों से वित्तीय जानकारी का आदान-प्रदान 

विदित हो कि स्विट्जरलैंड के फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (FTA) ने AEOI के वैश्विक मानदंडों के तहत 75 देशों को वित्तीय खातों के ब्योरे का आदान-प्रदान किया था| भारत भी इन 75 देशों में शामिल था| FTA ने साफ किया था कि सूचनाओं के इस आदान प्रदान की कड़े गोपनीयता प्रावधान के तहत निगरानी की जाएगी| अक्टूबर में FTA ने कहा था कि अगले साल इस व्यवस्था के तहत 90 देशों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा|

ज्ञात हो कि FTA ने उन खातों की सूचना दी थी जो लिस्ट दिए जाने तक सक्रिय थे| साथ ही उन खातों का ब्योरा भी उपलब्ध कराया गया था जो 2018 में बंद किए जा चुके हैं| फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन इस व्यवस्था के तहत अगली सूचना सितंबर, 2020 में साझा करेगा|

ज्ञात हो कि न्यूज एजेंसी PTI भाषा पत्रकार ने RTI (Right to Information) एक्ट 2005 के तहत ये जानकारियां मांगी थीं| पत्रकार के RTI कानून के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्रालय ने जवाब में कहा कि, ‘इस प्रकार के कर समझौतों के तहत सूचना का आदान-प्रदान गोपनीयता प्रावधान के अंतर्गत आता है| अत: RTI कानून की धारा 8 (1) और 8 (1) (एफ) के तहत विदेशी सरकारों से प्राप्त कर संबंधित सूचना के खुलासे से छूट प्राप्त है|’

अन्य देशों से प्राप्त सूचना के खुलासे से छूट

मगर यहां एक तथ्य बताते चलें कि जहां सेक्शन 8 (1) (a) उन सूचनाओं के खुलासों पर पाबंदी लगाता है जिससे भारत की संप्रभुता और एकता, सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक या आर्थिक हित, अन्य देशों से संबंधित प्रभावित होते हैं, वहीं दूसरे प्रावधान के तहत भरोसे के तहत अन्य देशों से प्राप्त सूचना के खुलासे से छूट है|

अमेरिका स्थित ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी नामक थिंक टैंक के अनुसार भारत में 2005-14 के बीच भारत में करीब 770 अरब डॉलर का काला धन आया, जबकि 165 अरब डॉलर का कालाधन देश से बाहर गया| हालांकि यह केवल एक आकलन है और सरकार की तरफ से इस बात की पुष्टि नहीं की गई थी|

भारतीयों की जमा राशि में दो गुना इजाफा

स्विस नेशनल बैंक की तरफ से हाल ही में बताया गया था कि वहां के बैंकों में वर्ष 2017 में भारतीयों की जमा राशि में 50 फीसदी यानी करीब दो गुना इजाफा हुआ है| अधिकृत तौर पर वहां भारतीय लोगों की जमा राशि करीब 7,000 करोड़ रुपये हो गई है| हालांकि आंकड़ों के मुताबिक, स्विस बैंक में जमा विदेशी धन में केवल 0.07 फीसदी धन ही भारतीयों का है|

जो भी आंकड़े और क़ानून हो, सरकार भले ही नामों का खुलासा करने के लिए प्रतिबंधित हो मगर कार्रवाई करने में कोई कसर नहीं रखनी चाहिए| बताते चलें की काला धन का मुद्दा सिर्फ आर्थिक और भ्रष्टाचार से ही संबंधित नहीं है, बल्कि राजनीतिक चुनाव प्रचारों का भी अहम् हिस्सा बनता रहा है यह|