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सार्वजनिक बैंकों के विलय से कर्मचारियों पर कोई असर नहीं

10 सार्वजनिक बैंकों का विलय किया जा चुका है

केंद्र सरकार वित्तीय घाटों से उभरने के लिए कई सार्वजानिक बैंकों का विलय कर रही है। बैंक ऋण लोन से जुड़ी बहुत सी योजनायें भी बनाई हैं। सरकार के इस फैसले से बैंकों में कार्य कर रहे कर्मचारियों को असुरक्षा महसूस हो रही है। लेकिन हालहि में केंद्र सरकार ने यह जाहिर किया है कि कर्मचरियों को सार्वजनिक बैंकों के विलय होने से सभी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी और उनकी नौकरी नहीं जाएगी। इसके साथ ही ग्राहकों को बेहतर सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जायेंगीं। बैंकों के विलय से कर्मचारियों को अधिकतम लाभ होगा।

कर्मचारियों के हितों का रखा जाएगा ध्यान

एजेंसी की खबर के मुताबिक, वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि विभिन्न बैंकों के विलय से मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनेंगें। किसी भी कर्मचारी को नौकरी नहीं छोड़नी पड़ेगी यह निश्चित है। राज्य मंत्री के अनुसार बैंकों के विलय से कर्मचारियों को अधिकतम लाभ होगा और इस विलय में उनके हितों का ध्यान रखा जायेगा। इस विलय प्रक्रिया के दौरान पर्याप्त सावधानी बरती है।  

बैंकों के विलय से होगा लाभ 

हांलाकि, सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों (पीएसबी) का विलय कर उन्हें चार पीएसबी में बदलने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बैंक के विलय से सरकार का लक्ष्य है कि एक सुद्रढ़ और निश्चित बैंक तैयार करना। इससे देश को अत्यधिक लाभ होगा और वित्तीय भंडार में पूंजी की बढ़त होगी।   

ध्यान दें, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (UBI) का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा जबकि इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक के साथ विलय होगा। राज्य मंत्री ने बताया कि यूबीआई का कुल कारोबार 2,08,000 करोड़ रुपये का है, जबकि PNB  का कुल कारोबार 11,82,224 करोड़ रुपये है। इस तरह से बैंकों का कुल कारोबार आकार 17,94,526 करोड़ रुपये होगा और बैंकों की विलय प्रक्रिया से देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।