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सिबिल स्कोर क्या है? CIBIL Score

बैंक आपको लोन देगा या नहीं, आपको क्रेडिट कार्ड मिलेगा या नहीं? ये सब काफी कुछ आपके सिबिल (CIBIL) स्कोर पर निर्भर करता है|

सिबिल स्कोर 3 अंकों की एक संख्या है| इस पर आधारित एक रिपोर्ट बनती है| यह सिबिल रिपोर्ट कहलाती है| इसमें आपकी क्रेडिट हिस्ट्री की पूरी जानकारी होती है| इसका पता ‘खातों’ के विवरण से लगाया जाता है| इसमें क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट, उनके पेमेंट का स्टेटस और उन्हें चुकाने में बचे दिन का सिलसिलेवार उल्लेख होता है|

स्कोर कर्ज लेने की पात्रता को दर्शाता है| यह लोन को अदा करने के पिछले रिकॉर्ड और आपकी उसे लौटाने की क्षमता पर आधारित होता है| इस स्कोर की रेंज 300 से 900 के बीच होती है| स्कोर जितना ज्यादा होता है, लोन मिलने की संभावना उतनी बढ़ जाती है| सच तो यह है कि 79 फीसदी लोन 750 से अधिक के सिबिल स्कोर को देखकर दिए जाते हैं| अर्थात 750 क्रेडिट स्कोर अच्छे रिकॉर्ड का परिणाम है और यह आपको लोन, क्रेडिट कार्ड आदि लेने में सहयोगी होता है|

TransUnion cibil limited (ट्रांसयूनियन सिबिल लिमिटेड) भारत की पहली क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनी है जिसे सामान्य रूप से क्रेडिट ब्यूरो भी कहा जाता है, जो व्यक्तियों और गैर-व्यक्तियों (वाणिज्यक निकायों) के लोन और क्रेडिट कार्डस से संबंधित भुगतानों के रिकार्ड्स जुटाते और रखते हैं| ये रिकार्डस्‌ बैंको और अन्य लेंडर्स द्वारा मासिक आधार पर जमा किए जाते हैं| इस जानकारी का उपयोग करके क्रेडिट इन्फोर्मेशन रिपोर्ट (CIR) तथा क्रेडिट स्कोर विकसित किया जाता है, जिनकी बदौलत लेंडर्स लोन आवेदनों का मूल्यांकन और स्वीकृत करते हैं| क्रेडिट ब्यूरो को RBI द्वारा अनुज्ञप्त किया जाता है और क्रेडिट इन्फोर्मेशन कंपनीज़ (रेगुलेशन) एक्ट ऑफ 2005 द्वारा अधिशासित किया जाता है| 

सिबिल (CIBIL) क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

सिबिल स्कोर लोन आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है| आवेदक द्वारा आवेदन पत्र भरने और उसे कर्जदाता को सौंपने के बाद कर्जदाता पहले आवेदक के क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट की जॉंच करता है| यदि क्रेडिट स्कोर कम है तो कर्जदाता शायद आगे आवेदन पर विचार भी न करे और उसी क्षण उसे अस्वीकृत कर दे| यदि क्रेडिट स्कोर अधिक होता है तो कर्जदाता आवेदन पर विचार करता है तथा यह तय करने के लिए अन्य विवरणों जैसे सैलरी, प्रॉपर्टी आदि के आंकड़ों पर भी विचार करता है कि आवेदन क्रेडिट के योग्य है या नहीं| क्रेडिट स्कोर कर्जदाता के लिए पहले प्रभाव के रूप में कार्य करता है, स्कोर जितना अधिक होता है, लोन पर समीक्षा किए जाने और स्वीकृत होने की संभावनाएँ भी उतनी ही बेहतर होती है| कर्ज देने का निर्णय केवल कर्जदाता पर निर्भर होता है और लोन/क्रेडिट कार्ड स्वीकृत हो या ना हो, इसपर सिबिल कोई अंतिम फैसला नहीं करता|

क्रेडिट स्कोर (Credit Score) को कैसे सुधारा जा सकता हूँ?

इसका सीधा सा जवाब है आप अच्छा क्रेडिट इतिहास बरकरार रखते हुए अपने क्रेडिट स्कोर को सुधार सकते हैं| इसे कर्जदाताओं द्वारा सकारात्मक रूप से देखा जा सकता है और इन सरल नियमों के साथ किया जा सकता है::

  1. हमेशा अपनी देय राशि समय पर अदा करें| विलंबित भुगतानों को देनदारों द्वारा नकारात्मक रूप से देखा जाता है|
  2. अपने सिबिल बैलेंस हमेशा बचा कर रखें| अत्यधिक क्रेडिट का उपयोग करना हमेशा उचित नहीं होता, अपने इस उपयोग को नियंत्रित रखें|
  3. क्रेडिट का स्वस्थ मेल बरकरार रखें| संरक्षित (जैसे होम लोन, ऑटो लोन) और असंरक्षित लोन्स (जैसे पसर्नल लोन, क्रेडिट कार्डस) का स्वस्थ मेल रखना बेहतर है| बहुत अधिक असंरक्षित लोन्स को नकारात्मक रूप से देखा जाता है|
  4. नए क्रेडिट का आवेदन मध्यम तरीके से करें| आप क्रेडिट को अत्यधिक आवश्यकता के रूप में नहीं दिखाएं, नई क्रेडिट के लिए सावधानी से आवेदन करें|
  5. अपने सह हस्ताक्षरकर्ता, गारंटीशुदा और संयुक्त अकाउंट्स की निगरानी मासिक रूप से करते रहें| सह- हस्ताक्षरकर्ता, गारंटीशुदा या संयुक्त रूप से धारित खातों में हुए गलत भुगतानों के लिए आपको बराबर का जिम्मेदार माना जाता है| आपके सह धारक (या गारंटीड व्यक्ति) की लापरवाही आपके ज़रूरत के समय में क्रेडिट पाने के लिए आपकी क्षमता को प्रभावित कर सकती है या भविष्य के लिए लोन लेने के लिए अपात्र बना सकती हैं| 
  6. पूरे वर्ष अपने क्रेडिट इतिहास की बार-बार समीक्षा करते रहें| लोन आवेदन की अस्वीकृति जैसे दुर्भाग्यपूर्ण प्रसंगों को टालने के लिए समय-समय पर अपनी CIR बढ़ाते रहें| लोन आवेदन अस्वीकृत होने पर कुछ महीने के लिए आवेदन पर प्रतिबन्ध लग जाता है| 

क्रेडिट स्कोर को कौन से प्रमुख कारक प्रभावित करते हैं?

4 प्रमुख कारक आपके स्कोर को प्रभावित करते हैं|

  1. भुगतान का इतिहास– विलंब से भुगतान करना या आपकी EMI में त्रुटि होना या बकाया रहना (हाल में या लगातार) दिखाता है कि अपनी मौजूदा क्रेडिट बाध्यताओं को अदा करने में आपको परेशानी हो रही है और यह आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है|देर से ईएमआई भरना या डिफॉल्ट करने का आपके सिबिल स्कोर पर प्रतिकूल असर पड़ता है|
  2. क्रेडिट सीमा का अधिक उपयोग– अपने क्रेडिट कार्ड पर बढ़ा हुआ खर्च ज़रूरी नहीं है कि आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, वहीं दूसरी ओर आपके क्रेडिट कार्ड के मौजूदा बैलेंस में बढ़ोतरी होना चुकता करने के बढ़े हुए भार का संकेत करता है और आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है| हाई क्रेडिट यूटिलाइजेशन लिमिट समय के साथ कर्ज बढ़ने का संकेत देती है|
  3. क्रेडिट कार्डस या व्यक्तिगत (पसर्नल) लोन्स का उच्चतर प्रतिशत (जिसे असंरक्षित लोन के रूप में भी जाना जाता है)– संरक्षित लोन्स (जैसे ऑटो, होम लोन, और असंरक्षित लोन (जैसे पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, के बीच संतुलन रखने से आपके स्कोर पर अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना होती है| मिलेजुले सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन होने का आपके क्रेडिट स्कोर पर सकारात्मक असर होता है|
  4. हाल ही में कई नए खाते खोलना – यदि आपको हाल ही में विविध लोन्स और क्रेडिटस कार्डस की स्वीकृति मिली है तो देनदार आपके आवेदन को सावधानी से देखेंगे क्योंकि यह आचरण संकेत करता है कि आपके ऋण का भार बढ़ चुका है, जो आपके स्कोर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा|

कुल मिलकर अगर इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपका CIBIL स्कोर अच्छा होते जाएगा::

  • अपने बकाया बिलों का भुगतान हमेशा समय से करें| लेट पेमेंट को बैंक अच्छा नहीं मानते हैं|
  • क्रेडिट का इस्तेमाल बहुत ज्यादा नहीं करें| खर्चों पर अंकुश लगाएं|
  • होम और ऑटो लोन जैसे सिक्योर्ड लोन और पसर्नल और क्रेडिट कार्ड सरीखे अनसिक्योर्ड लोनों के बीच संतुलन बनाएं| बहुत ज्यादा अनसिक्योर्ड लोन को अच्छा नहीं माना जाता है|
  • ज्वाइंट अकाउंट है तो ज्वाइंट अकाउंट होल्डर पर नजर रखें| ज्वाइंट अकाउंट होल्डर की लापरवाही का भी आपके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ता है| किसी के गारंटर बनने से पहले सोच लें|
  • समय-समय पर क्रेडिट हिस्ट्री की समीक्षा जरूर करें| अपने सिबिल स्कोर पर नजर बनाकर रखें| रिपोर्ट को नियमित रूप से जांचने से आप बैंक की ओर से कोई गलती होने पर उसे सुधरवा पाते हैं|

क्या किसी के सिबिल रिकार्डस को मिटा या बदला जा सकता हैं?

सिबिल रिकार्डस को मिटा या बदल नहीं सकती जो आपके सीआईआर को अपने आप प्रतिबिंबित करती हैं, यह केवल अपने सदस्यों (बैंकों और वित्तीय संस्थानों) द्वारा प्रदान किए गए व्यक्तियों के रिकार्डस जुटाते हैं| इसमें ‘अच्छी’ और ‘बुरी’ क्रेडिट या दोषी व्यक्तियों की सूची भी नहीं होती|

जब स्कोर NA या NH हो तो उसका क्या अर्थ होता है?

लागू नहीं या एनएच का स्कोर होना बिलकुल बुरी बात नहीं है| इसका अर्थ निम्नलिखित में से एक होता हैं :

-आपको कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है या स्कोर करने के लिए आपका क्रेडिट इतिहास पर्याप्त नहीं हैं, यानी आप क्रेडिट सिस्टम में नए हैं|

-पिछले दो वर्षों में आपने कोई क्रेडिट गतिविधि नहीं की है|

-आपके पास सभी ऐड-ऑन क्रेडिट कार्डस हैं और आप क्रेडिट के लिए उन्मुख नहीं हुए है|

-यह महत्वपूर्ण है कि इन स्कोर्स को कर्जदाता द्वारा नकारात्मक रूप से नहीं देखा जाता, लेकिन कुछ कर्जदाताओं को क्रेडिट नीति “एनए” या “एनएच” स्कोर वाले आवेदक को कर्ज देने से रोकती है (कोई क्रेडिट ट्रैक रिकार्डर ना रखने वाले आवेदक) अतएव आपको अन्य स्थान पर लोन के लिए आवेदन करने की बेहतर संभावना हो सकती है|

सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर 2.0 क्या है?

सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर 2.0 क्रेडिट स्कोर का एक नया, अद्यतनीकृत संस्करण है जिसे उपभोक्ता प्रोफाइल्स और क्रेडिट डाटा के वर्तमान रूझानों व बदलावों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है| बैंक धीरे-धीरे नए संस्करण को अपना रहे हैं और पिछले संस्करण की तुलना में आपको नए संस्करण में एक अंतर मिल सकता है (यानी स्कोर 2-0 पिछले संस्करण की तुलना में कमतर हो सकता है)| कृपया ध्यान दें, वर्तमान में आपके लिए उपलब्ध स्कोर पहले वाला संस्करण है| तथापि क्रेडिट स्कोर में अंतर लोन स्वीकृति प्रक्रिया के दौरान क्रेडिट के फैसले कोप्रभावित नहीं करता हैं क्योंकि स्कोर के दोनों संस्करणों में लोन आवेदन की प्रक्रिया के दौरान भिन्न भिन्न स्कोर पात्रता कट ऑफ हो सकती है|उदाहरण के लिए, यदि आपके बैंक ने पहले व्यक्तियों को लोन/क्रेडिट कार्डस की मंजूरी 800 और अधिक के क्रेडिट स्कोर के साथ दी है तो अब यदि नया संस्करण अपनाया जाता है तो उसका स्कोर कट ऑफ कम हो सकता है|सिबिल ट्रांसयूनियन स्कोर 2.0 ने उन व्यक्तियों के लिए जोखिम इंडेक्स स्कोर भी प्रस्तुत किया है जिनका क्रेडिट इतिहास 6 माह से कम है|

सम्पूर्ण रूप से कहा जाए तो इसे निकालने के लिए कई तरह का जटिल गुणा-भाग किया जाता है| लेकिन इसका एक सामान्य सा ट्रिक है की आपके लोन चुकाने का ट्रेंड| इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप लोन चुकाने में ईमानदार हैं, तो बैंक भी आपको लोन देने में दिलचस्पी दिखाएंगे|इसलिए अपने बैंकिंग लेनदेन को हमेशा स्वच्छ रखें|