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सिबिल स्कोर/ क्रेडिट स्कोर क्या है? CIBIL Score

सिबिल स्कोर एक 3 अंको की संख्या है।

सिबिल स्कोर/ क्रेडिट स्कोर क्या है? – बैंक आप को क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करवाता है। बैंक आप को क्रेडिट कार्ड आप की आया के अनुसार उपलब्ध करवाता है। उसके बाद आप को कभी क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने की आवशकयता पड़ गई तो उस वक़्त बैंक आप का सिबिल स्कोर देखता है। उसके आधार पर बैंक आप को लोन उपलब्ध करवाता है। 

बैंक आप का सिबिल (CIBIL) स्कोर देख कर ही लोन देता है। आप का सिबिल स्कोर जितना अच्छा होगा आप को लोन उतना ही जल्दी मिलने के ज्यादा चांस हैं। सिबिल स्कोर में आप के कार्ड की पूरी हिस्ट्री देखी जाती है। उसके आधार पर आप को लोन दिया जाता है।

बैंक आप के क्रेडिट कार्ड के द्वारा किये गए खर्च क्रेडिट कार्ड द्वारा किये गए खर्च का आप ने किस तरह भुगतान किया है। आप ने क्रेडिट कार्ड की EMI कैसे चुकाई हैं। कितने टाइम में आप ने अपने क्रेडिट कार्ड का भुगतान किया है। भुगतान करने में कभी देरी हुआ है या नहीं, इन सभी बातों को ध्यान में रख कर बैंक आप को क्रेडिट कार्ड पर लोन उपलब्ध करवाता है।

सिबिल स्कोर (CIBIL Score) 3 अंको के आधार पर देखी जाती है

सिबिल स्कोर एक 3 अंको की संख्या है। इन 3 अंकों की संख्या के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है। जिसको सिबिल रिपोर्ट कहते हैं। इस रिपोर्ट में उपभोगता का पूरा ब्यौरा होता है। सिबिल स्कोर का पता आप के द्वारा किये गए भुगतान के अनुसार लगाया जाता है।

सिबिल स्कोर लोन लेने की पात्रता को मजबूत बनाता है। क्रेडिट कार्ड का सिबिल स्कोर उपभोगता के किये गए भुगतान के आधार पर किया जाता है। सिबिल स्कोर की रेंज 300 से 900 अंकों के बीच की होती है। क्रेडिट कार्ड उपभोगता का स्कोर जितना ज्यादा होता है। उपभोगता को लोन मिलना उतना ही आसान हो जाता है। 79 प्रतिशत लोन सिबिल स्कोर के आदार पर ही दिए जाते जाते हैं।

लोन की बार बार पूछताछ से CIBIL स्कोर होता है नकारात्मक 

सिबिल स्कोर का असर आप के द्वारा किये गए भुगतानों के आधार पर तय होता है। सिबिल स्कोर का कम होने का कारन बहुत सी बातों पर निर्भर करता है। उपभोगता की पेमेंट करने के तरीके को भी ध्यान में रखा जाता है। अगर उपभोगता ने देर से पेमेंट की है या पेमेंट करने में डिफ़ॉल्ट कर दिया है। इस बहुत ज्यादा असर सिबिल स्कोर पर पड़ता है।

उपभोगता ने मिलेजुले सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन का क्रेडिट स्कोर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। यदि आप ज्यादा बार लोन के लिए पूछताछ करते हैं तो उसका गलत असर पड़ता है क्रेडिट स्कोर पर, उपभोगता के बार बार पूछने पर बैंक को ये  अंदाजा हो जाता है इस उपभोगता को दिया गया लोन बैंक पर बोझ पड़ सकता है।  बार-बार पूछताछ भी आप के स्कोर को कम करती है।

उपभोगता अगर ज्यादा से ज्यादा क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है। और समय पर भुगतान नहीं कर पाता है उसका भी असर उभोगता के क्रेडिट पर पड़ता है।

समय पर भुगतान करना सिबिल स्कोर को बनाता है सकारात्मक

उपभोगता का अगर सिबिल स्कोर खराब हो चूका है तो इसे सुधार भी जा सकता है।  सिबिल स्कोर खराब है तो डरने की बात नहीं है।  उपभोगता आसानी से इसे सुधार सकते हैं।  अभी भी आप अपने बकाया बिलों का अच्छे से समय पर भुगतान करना चालू कर दें।  भुगतान करने में देर न करें।  बैंक समय निकलने के बाद किये गए भुगतान को गलत मानता है।  आप के क्रेडिट स्कोर को नकारात्मक असर पड़ता है।

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम से कम कर दीजिये।  अपने खर्चों को कम कीजिये।  आप ज्यादा से ज्यादा सिक्योर्ड लोन ही लें और उनका समय पर ही भुगतान करें।  अगर आप का जॉइंट खाता है तो आप अपने जॉइंट खाताधारक पर नजर रखें।  उनके लापरवाही करने पर भी आप के क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ता है।

समय निकाल कर आप अपने क्रेडिट कार्ड की हिस्ट्री चेक करते रहे। और जो कमियाँ आ रही है उनको दूर करने की कोशिश करें। और जो गलतियाँ आप ने शुरुआत में की है उनको भविष्य में दौबारा करने की गलती न करें। आप को अगर भविष्य में लोन लेने की इच्छा है आप को लोन बिना किसी परेशानी के मिल जाए इसके लिए आप अपने सिबिल स्कोर को सुधार कर बैंक की नजरों में अच्छे उपभोगता के रूप में बन सकते हैं।