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कर्मचारी अपनी मर्जी से घटा बढ़ा सकते हैं अपना पीएफ

अपनी मर्जी से कटवाएंगे कर्मचारी अब पीएफ

आपकी टेक होम सैलरी (हाथ में आने वाला वेतन) जल्द बढ़ सकती है। सरकार इसके लिए ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2019’ बिल लाई है। कैबिनेट से इस बिल को मंजूरी मिल गई है। इस हफ्ते बिल को संसद के पटल पर रखा जा सकता है। इस बिल में कामकाजी लोगों को अपना भविष्य निधि (पीएफ) कोष में योगदान घटाने का विकल्प दिया गया है।

कामकाजी महिलाओं, विकलांग प्रोफेशनल या 25-35 साल के कामकाजी पुरुषों को प्रोविडेंट फंड में कॉन्ट्रिब्‍यूशन 2-3 फीसदी घटाने की इजाजत मिल सकती है। एक वरिष्‍ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि पीएफ में कम कॉन्ट्रिब्‍यूशन का नियम सबके लिए लागू नहीं होगा। उन्‍होंने कहा, ”यह यूनिवर्सल नहीं होगा। कुछ ही श्रेणियों के लिए इसकी इजाजत दी जाएगी। ” उन्‍होंने बताया कि वर्करों की इन श्रेणियों का निर्धारण कुछ मानकों के आधार पर किया जाएगा।

जिन मानकों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एक यह भी है कि कामकाजी महिलाओं और विकलांग पेशेवर लोगों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है।  श्रम मंत्रालय 2-3 फीसदी कम पीएफ कॉन्ट्रिब्‍यूशन की इजाजत के दायरे में आने वाले वर्करों की कैटेगरी तय करने के प्रस्‍तावित मानकों पर विचार कर रहा है।

युवाओं को ज्यादा जरूरत पैसों की

जानकारों का कहना है कि भविष्य निधि के हिस्से में कम रकम जमा करने से कर्मचारियों को हाथ में अधिक सैलरी आएगी। यह रकम भविष्य निधि (पीएफ) में कम कटौती करने से मिलेगी। सरकार की योजना इस तरह के बदलाव कर आम लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा देना है। इससे नौकरीपेशा वर्ग को खर्च करने की क्षमता बढ़गी। इससे बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को तेज करने में मदद मिलेगी।

अधिकारी ने कहा, सरकार को एहसास है कि रिटायरमेंट के समय सोशल सिक्‍योरिटी की जरूरत होती है।  हालांकि, युवा कर्मचारियों को शादी, मकान खरीदने और करियर के शुरुआती वर्षों में दूसरी जरूरतों के लिए हाथ में ज्‍यादा पैसे की आवश्‍यकता भी होती है।  इसी को देखते हुए इस प्रस्‍ताव पर विचार किया जा रहा है।

अभी सभी कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्‍सा अनिवार्य रूप से कर्मचारी प्रोविडेंट फंड के तहत देना होता है।  इतनी ही रकम उनके नियोक्‍ता की ओर से आती है. कंपनी के अंशदान में 8.33 फीसदी हिस्‍सा कर्मचारी पेंशन स्‍कीम में जाता है।

पीएफ में कम रकम जमा करने से फौरी तौर पर कर्मचारियों को महीने के अंत में मिलने वाला वेतन बढ़ेगा तो जरूर लेकिन इसके चलते रिटायरमेंट में कमी आएगी। ऐसा इसलिए कि जब पीएफ में अधिक रकम जमा होता है तो रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला फंड काफी बड़ा होता है।