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हॉस्पिटल शेयरों में मजबूती कायम- निवेश करना सुरक्षित है

कर्ज का दबाव के बावजूद भारत में प्रमुख अस्पताल अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं।

अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद हॉस्पिटल शेयरों में मजबूती कायम है। बीते कुछ सालों में हॉस्पिटल कंपनियों के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं जिससे हॉस्पिटल शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। इसके पीछे कई साकारात्मक वजहें हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार हॉस्पिटल शेयरों में नारायण हृदयालय और अपोलो हॉस्पिटल विश्लेषकों की पहली पसंद बने हुए हैं। हॉस्पिटल कंपनियों ने साल 2008 से 2018 के दौरान कारोबार में काफी निवेश किया है। अब वे एसेट लाइट मॉडल यानी कारोबार में निवेश घटा रहे हैं।
नारायण हृदयालय, लोटस आई हॉस्पिटल, कोवई मेडिकल सेंटर और एस्टर डीएम हेल्थकेयर के शेयरों ने 12 से 26 फीसदी तक की छलांग लगाई है। शैल्बी हॉस्पिटल्स का शेयर 8 फीसदी मजबूत हुआ है। इस दौरान बीएसई मिडकैप इंडेक्स 7.6 फीसदी और हेल्थकेयर इंडेक्स 1.56 फीसदी चढ़ा है।

ICICI सिक्योरिटीज के रिसर्च प्रमुख पंकज पांडे ने बताया कि पूंजी आधारित इस कारोबार के नकद प्रवाह में कुछ समय लगता है। परन्तु बीते कुछ सालों में इन कंपनियों ने खुद को लगातार विस्तार दिया है। लिहाजा इसका असर कई प्रथम श्रेणी के हॉस्पिटल्स में भी देखने को मिल रहा है। उन्होंने ये भी कहा कि विस्तार का दौर खत्म हो चुका है, अब प्रमुख अस्पतालों का मार्जिन काफी अच्छा है।

ब्रोकेरज की सलाह हॉस्पिटल शेयरों में निवेश करना सुरक्षित –

  • ब्रोकरेज ने नारायण हृदयालय के शेयरों के पक्ष में बात करते हुए इसे 350 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।
  • साथ ही कहा है 1,800 रुपये के टार्गेट प्राइस के साथ अपोलो हॉस्पिटल्स को खरीदना अच्छा रहेगा।
  • ब्रोकरेज फर्म सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स के अनुसार अपोलो का 1,970 रुपये का टार्गेट प्राइस बनाए रखा है।
  • हेल्थकेयर ग्लोबल का विश्लेषण करते हुए इसे 170 रुपये के टार्गेट प्राइस के साथ खरीदने की सलाह दी गयी है।

ब्रोकेरज फर्म सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स ने कहा, कई कंपनियों पर कर्ज का दबाव के बावजूद भारत में प्रमुख अस्पताल अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। उनके मार्जिन और रिटर्न अनुपात में सुधार बना हुआ है, इससे वैल्यूएशन बेहतर होगी। ब्रोकेरज कहते हैं निवेशकों के हॉस्पिटल शेयर में दिलचस्पी की वजह ये है कि बीते कुछ समय में फार्मा कंपनियों पर नियामकीय दबाव हैं। लगातार बढ़ता मेडिकल टूरिज्म भी इस क्षेत्र में सम्भावनाओ को बढ़ा रहा है, जिसके कारण हॉस्पिटल कंपनियों के शेयरों में निवेश करना सुरक्षित है।