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औद्योगिक उत्पादन में 1.8 फीसदी बढ़ोतरी हुई

औद्योगिक बाज़ार मे खुशहाली

आर्थिक मोर्चे पर शुक्रवार का दिन सरकार के लिये राहत वाला रहा। तीन महीने तक गिरावट दर्ज करने के बाद नवंबर 2019 में औद्योगिक उत्पादन में 1.8 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार पर मापी जाने वाली औद्योगिक विकास दर एक साल पहले नवंबर 2018 में 0.2 फीसदी रही थी। अक्टूबर 2019 में आईआईपी 3.8 फीसदी गिरा था। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में कहा गया कि चालू कारोबारी साल में अप्रैल से नवंबर तक की अवधि में औद्योगिक विकास दर 0.6 फीसदी रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 5.0 फीसदी थी।

नवंबर में इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 17.1 फीसदी बढ़ा। इस सेगमेंट का उत्पादन एक साल पहले की समान अवधि में 4.1 फीसदी घटा था। कंज्यूमर नॉन ड्यूरेबल्स में भी 2 फीसदी तेजी रही, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 0.3 फीसदी गिरावट थी।

आंकड़ों मे आई गिरावट

इस दौरान प्राइमरी गुड्स का उत्पादन 0.3 फीसदी घटा। पिछले साल की समान अवधि में इसमें 3.2 फीसदी की बढ़ोतरी रही थी। कैपिटल गुड्स का उत्पादन 8.6 फीसदी घटा। एक साल पहले की समान अवधि में इसमें 4.1 फीसदी गिरावट थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर व कंस्ट्रक्शन गुड्स का उत्पादन 3.5 फीसदी घटा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसमें 4.8 फीसदी बढ़ोतरी हुई थी। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.5 फीसदी गिरावट रही। पिछले साल की समान अवधि में भी इसमें तीन फीसदी गिरावट थी।

एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, साल भर पहले की तुलना में नवंबर 2019 में विनिर्माण श्रेणी के 23 उद्योग समूहों में से 13 में वृद्धि हुई। डिलॉयट इंडिया में अर्थशास्त्री रुमकी मजुमदार ने आंकड़ों पर कहा कि उद्योग क्षेत्र को कुछ गति मिलने की यह खबर बाजार और नीति निर्माताओं के लिये राहत है। उन्होंने कहा कि मासिक आधार पर पूंजीगत व टिकाउ वस्तुओं में वृद्धि व्यापक रही है और इनमें ठीक-ठाक सुधार हुआ है। फर्नीचर को छोड़ लकड़ी व कॉर्क के उत्पाद बनाने वाले उद्योग एवं स्ट्रॉ आदि बनाने वाले उद्योग में सर्वाधिक 23.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बेसिक मटीरियल्स में 12.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, अन्य विनिर्माण श्रेणी में सर्वाधिक 13.5 प्रतिशत की गिरावट आयी। मोटर वाहन, ट्रेलर व सेमी-ट्रेलर विनिर्माण में 12.6 प्रतिशत की गिरावट रही।