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बजट में सरसों तेल विकास बोर्ड की मांग

भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है

भारत दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा आयातक देश बन गया है|देश में खाने के तेल की जरूरत का तकरीबन 60-65 फीसदी आयात होता है।खाद्य तेल के मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने में सरसों तेल विकास बोर्ड अहम भूमिका निभा सकता है| लिहाजा सरकार को इस दिशा में विचार करना चाहिए। तिलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में जब तक नियोजित ढंग से प्रयास नहीं होगा तब तक भारत खाने के तेल के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बन पाएगा।ये बजट पूर्व सुझाव पुरी आयल मिल्स के प्रबंध निदेशक विवेक पुरी ने दिए हैं| उन्होंने ये सुझाव वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट 2020 के लिए मांगे गये परामर्श के बाद दिए हैं|

महंगाई को भड़का रहा है तेल:

हाल के दिनों में देखा गया है तेल की बेलगाम कीमतों से महंगाई में बढ़ोत्तरी हुई है| भारत अपनी तेल संबंधी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है|आयातित तेलों में पाम एवं सोयाबीन आयल आयात शुल्क के बाद उपभोक्ता के लिए महंगे हो जाते हैं| खाने के तेल के लिए आयात पर बढ़ती निर्भरता भारत के लिए  चिंता का विषय है।इन्ही चिंताओं को आधार मानकर विवेक ने वित्त मंत्री को अपना सुझाव दिया है|

घरेलू खाद्य तेल उद्योग के अनुरूप बने नीति:

आगामी बजट 2020-21 से पूर्व परमर्श में विवेक घरेलु उद्योग को बढ़ावा देने का आग्रह किया है| उन्होंने कहा कि भारत सरकार को घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए अनुकूल नीति बनानी चाहिए जिससे किसानों, उपभोक्ताओं और तेल उत्पादकों को समान रूप से उसका फायदा मिले।भारत को अमेरिकी सोयाबीन एसोसिएशन, स्पेन की इंटरनेशनल ऑलिव कौंसिल और मलेशियन पाम ऑयल बोर्ड की तर्ज पर भारत में सरसों तेल विकास बोर्ड का गठन करना चाहिये| प्रस्तावित सरसों तेल विकास बोर्ड अनुसंधान व विकास के माध्यम से उसी तरह अहम भूमिका निभा सकता है जिस प्रकार सोयाबीन उद्योग ने सोया प्रोटीन, सोया मिल्क व अन्य उत्पाद बनाकर किया है। बोर्ड सरसों के उत्पादों का मूल्य वर्धन कर इस उद्योग के विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित कर सकता है।

तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन:

पुरी ने अपने परामर्श पत्र में 1980 के दशक के तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन का भी जिक्र किया है| उन्होंने बताया इस मिशन का उद्देश्य तिलहनों की उत्पादकता बढ़ाना था ताकि आयात बिल कम हो। उस समय देश की कुल जरूरतों का तकरीब 50 फीसदी खाद्य तेल आयात होता था। मिशन लांच होने के 10 साल बाद 1993-94 में भारत खाने के तेल के मामले में लगभग आत्मनिर्भर बन गया क्योंकि देश में खाद्य तेल की कुल जरूरतों का 97 फीसदी घरेलू उत्पादन होने लगा और खपत का महज तीन फीसदी खाद्य तेल का आयात होता था। बाद में तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन की प्रगति कम होती गई और इसके फलस्वरूप धीरे-धीरे तेल आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ती चली गई। पुरी ने कहा भारत में सरसों तेल खाने का सवोत्तम तेल है जिसमें सेहत के लिए गुणकारी तत्व हैं और सरसों की न सिर्फ आर्थिक प्रासंगिकता है बल्कि भारतीय व्यंजनों के लिए इसकी समृद्ध विरासत भी है। भारतीय सरसों तेल उद्योग को उम्मीद है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2020-21 का बजट बनाने के दौरान इन बातों का ख्याल रखेंगी।