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230 करोड़ रुपये से घाटे में है पवन हंस

सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी पवन हंस कंपनी में है

हेलिकॉप्‍टर सर्विस प्रोवाइड कराने वाली कंपनी पवन हंस को बेचने की प्रक्रिया सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है| सरकार कंपनी को बेचने के लिए नए सिरे से नीलामी कर सकती है। इसमें संभावित खरीदारों को कंपनी पर 500 करोड़ रुपये की आकस्मिक देनदारी के बदले क्षतिपूर्ति का प्रवाधान भी हो सकता है।

बता दें, सरकार ने खरीदार की तलाश में तीसरी बार पवन हंस के विनिवेश के लिए रुचि पत्र यानी ईओआई की समय मर्यादा बढ़ाई है| पहले ईओआई दाखिल करने की डेडलाइन 26 सितंबर तक थी अब 10 अक्टूबर कर दी गई है| गौरतलब, कोई कंपनी या व्‍यक्‍ति जब ईओआई दाखिल करता है इसका मतलब यह है कि वह नीलाम होने वाली कंपनी को खरीदने के लिए इच्‍छुक है| इसकी समय मर्यादा उन परिस्थितियों में बढ़ाई जाती है जब कंपनी को कोई खरीदार नहीं मिलता है|

पवन हंस कंपनी ने बताया कि, सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी कंपनी में है। वहीँ 49 फीसदी हिस्सेदारी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के पास है। पवन हंस में पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी को बिक्री के लिए रखा गया है। परामर्शदाताओं के अनुमान के मुताबिक हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 1,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सरकार के पास कंपनी के 2 लाख 84 हजार 316 शेयर हैं| इसी तरह ओएनजीसी के पास 2 लाख 73 हजार 166 शेयर हैं|

बता दें, हेलिकॉप्‍टर प्रोवाइडर कंपनी पवन हंस की वेबसाइट की जानकारी के मुताबिक साल 2017-18 में सबसे अधिक कमाई प्रति घंटे के आधार पर हुई| टोटल इनकम में प्रति घंटे के हिसाब से कंपनी को 46 फीसदी कमाई हुई| हर घंटे पवन हंस ने अपना हेलिकॉप्‍टर किराये पर दिया और उससे कुल इनकम की 46 फीसदी कमाई कर ली| कंपनी सबसे अधिक पैसा (39 फीसदी) अपने कर्मचारियों पर खर्च करती है| 31 मार्च 2018 को खत्‍म हुए वित्त वर्ष में पवन हंस ने अपने कर्मचारियों की सैलरी और अन्‍य भत्तों पर कुल 17 हजार 263 करोड़ रुपये के करीब खर्च किए| जबकि पीएफ, पेंशन और ग्रेच्‍युटी फंड में 2 हजार 304 लाख रुपये खर्च हुए| इसके एक साल पहले पवन हंस ने कर्मचारियों पर 15 हजार 444 करोड़ रुपये खर्च किए थे|