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3.99 फीसदी पर खुदरा महंगाई दर

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 0.33 फीसदी

भारत में बढ़ती महंगाई हमेशा से ही एक बड़ी समस्या रही है|महंगाई के कारण चीज़ों की कीमतें बढ़ने का असर लोगों के जीवन स्तर पर भी पड़ता है|मंदी के दौर में  लोगों की घटती बचत का एक बड़ा कारण ये भी है|महंगाई की सबसे ज़्यादा मार ग़रीबों पर पड़ती है तो मध्यम वर्ग का जीवन स्तर भी इससे बुरी तरह प्रभावित होता है|वित्त मंत्रालय के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार सीतम्बर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर  3.99 फीसदी हो गयी है|

बीते सितम्बर महीने में प्याज की कीमतों में आये लगभग ५४ उछाल से खुदरा महंगाई दर 3.99 फीसदी पर पहुच गयी जो कि अगस्त महीने में 3.21 फीसदी थी|खुदरा महंगाई दर में हुई ये वृद्धि अगस्त २०१८ के बाद सबसे ज्यादा है|भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई राज्यों में प्याज की फसल को काफी नुक्सान पहुचा|इस दौरान देश के कई राज्यों में प्याज 80 रूपये प्रति किलोग्राम की दर से बिका|खाद्य पदार्थों की अप्रत्याशित कीमतों में उछाल का एक बड़ा कारण भार की खराब भंडारण व्यवस्था भी है|  ब्रिटेन स्थित मैकेनिकल इंजीनियर्स इंस्टीट्यूशन द्वारा ने  रिपोर्ट में बताया था कि भारत में हर साल खेत से ग्राहकों तक पहुँचने के दौरान अपर्याप्त कोल्ड स्टोरों के कारण 40 प्रतिशत फल औऱ सब्जियां ख़राब हो जाते हैं|

हालाकि इस दौरान थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर महीने में 0.33 फीसदी पर आ गई है। यह जून 2016 के सबसे निचले स्तर पर है। अगस्त में यह 1.08 फीसदी थी।सितंबर के दौरान खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी की दर 7.47 फीसदी रही। वहीं गैर-खाद्य पदार्थों की कीमतों की वृद्धि दर 2.18 फीसदी रही। सितंबर में फल, सब्जियां, गेहूं, मीट और दूध की थोक महंगाई दर 0.6 फीसदी रही है।विदित हो कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति मूल रूप से उपभोक्ता महंगाई दर के आधार पर तैयार की जाती है।