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भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र अमेरिका का एक मजबूत नीतिगत साझेदार

भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को भी मजबूत रखने की अनुमति बराबर होनी चाहिए

भारत का जीडीपी ग्रोथ साल 2013 के अप्रैल- जून के दौरान सबसे निचला रहा वही परिस्थिति साल 2019 के शुरुआती महीनों में देखने को मिली| जिससे निपटने के लिए मोदी सरकार ने हर सेक्टरों में प्रयास किए और निरंतर हैं| हाल ही में बैंकिंग सेक्‍टर के जरिये लोन – देन योजना का आयोजित की जिसके तहत 80,000 करोड़ रुपये से अधिक का राशि का भुगतान किया गया। वहीं इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर में भी 100 लाख करोड़ निवेश करेगी जिसके जरिये घरेलू ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।

वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि, भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र अमेरिका का नीतिगत साझेदार है| भारत वैश्विक प्रतिबंधों का पालन करना चाहता है| जिसमें वेनेजुएला और रूस पर लगाया गया अमेरिकी प्रतिबंध भी शामिल है। अमेरिका के साथ मजबूत साझेदारी की कद्र करते हुए भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को भी मजबूत रखने की सामान अनुमति मिलनी चाहिए। क्यूंकि भारत को स्वयं की अर्थव्यवस्था को सुद्रढ़ बनाने के लिए नीतिगत हितों में बराबरी होनी चाहिए|

हालांकि, इस साल वेनेजुएला और रूस पर अमेरिकी प्रतिबंध था| जनवरी में वेनेजुएला की ऑयल इंडस्‍ट्री पर कठिन प्रतिबंध लगाया था। इस कदम से कई वैश्विक ग्राहक दूर हुए थे, लेकिन हेवी ऑयल के आपूर्तिकर्ताओं के विकल्‍पों के कारण भारत की रिलायंस इंस्‍ट्रीज लिमिटेड रूस की कंपनी रोसनेफ्ट से वेनेजुएला के क्रूड ऑयल की खरीदारी करती रही। विदित हो, अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष ने 2019 में भारत के ग्रोथ के अनुमानों में कटौती की थी। वहीं अमेरिका-चीन के व्‍यापार युद्ध के कारण 2019 में वैश्विक ग्रोथ आर्थिक संकट की वजह से व्यापर में सुस्ती देखने को मिली|