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जानीये क्या है पैन कार्ड का कानूनी आधार?

पैन कार्ड का उपयोग किन विधिक प्रावधानों के अंतर्गत आता है

भारत एक लोकतांत्रिक देश है|यहां हर प्रावधान संविधान के अनुरूप है|आज देश में पैन कार्ड की अनिवार्यता प्रायः हर निवेश में देखी जा सकती है| दरअसल पैन या स्थाई खाता संख्या के द्वारा आयकर विभाग कर दाताओं पर नजर रखता है|आज जानते हैं Pan Card का उपयोग किस आयकर कानून  के अंतर्गत आता है|

पैन कार्ड आवंटन का कानूनी आधार:

स्थाई  खाता संख्या की नयी श्रृखंला के आवंटन तथा प्रयोग के लिए कानूनी अधिकार आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 139क से उत्पन्न हुआ है। यह धारा पैन नम्बर के लिए तंत्र निर्धारित करता है|आयकर विभाग के अनुसार वो परिस्थितियां जिनमें पैन प्रयुक्त होता है,निम्नलिखित हैं|

  • जिसे स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन करना आपेक्षित है|
  • कोई जो स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन कर सकता है|
  • जिसे स्थाई खाता संख्या(पैन) आवंटित की जा सकती है|
  • लेनदेन जहां पैन नंबर  उद्धृत करना आपेक्षित है|
  • स्रोत पर कर कटौती प्रमाणपत्रों तथा स्रोत पर कर कटौती विवरणी में पैन नम्बर का  प्रयोग|
  • वो नीयम जिसके तहत  व्यक्ति केवल एक पैन रख सकता है तथा स्थाई खाता संख्या आवेदन करने का तरीका|

पैन(PAN) के लिए आवेदन की धारा:

स्थाई खाता संख्या के लिए आवेदन करने का तरीका आयकर अधिनियम, 1962 के नियम 114 में निर्धारित है। यह नियम 2011 में संशोधित किए गए हैं, साथ ही स्थाई खाता संख्या आवेदक की पहचान तथा पते के प्रमाण के तौर पर स्थाई खाता संख्या आवेदन (प्रपत्र 49क अथवा 49कक, जैसी भी स्थिति हो सकती हैं, में) सहित जमा किए जाने हेतु आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियों को भी निर्दिष्ट करता है।

प्रमुख नियम एवं उनके उद्देश्य:

  1. धारा 114 (ख) नीचे दस्तावेजों को सूचीबद्ध करता है जिसमें निर्दिष्ट लेनदेन/गतिविधि करते समय उद्धृत करना आपेक्षित है।
  2. धारा  114 (ग)  व्यक्ति जिन पर धारा 139 (क) लागू नही होती। यह वह व्यक्ति हैं जिनके पास प्रपत्र 61 में घोषणा की प्रस्तुति द्वारा कृषि आय हैं, गैर-निवासी तथा केंद्र सरकार/राज्य सरकार तथा वाणिज्यिक दूतावास, जहां वह याचना करते हैं, को सूचीबद्ध करता है|
  3. धारा 139 (क) के प्रावधानों के अनुसार विफलता के लिए धारा 272 (ख) के अंतर्गत रू. 10,000 का जुर्माना कर योग्य है|
  4. प्रपत्र (60) जिन व्यक्तियों के पास स्थाई खाता संख्या नहीं है| प्रपत्र 60 में एक घोषणा की प्रस्तुति पर पैन कार्ड  को उद्धृत करने से मुक्त हैं।

Pan Card कब तक वैध:

एक बार पैन प्राप्त करने पर यह जीवनभर के लिए पूरे भारत में पैन-धारक के लिए वैध है।यह पते में परिवर्तन अथवा निर्धारण अधिकारी आदि के परिवर्तन द्वारा प्रभावित नही होता। हालांकि, पैन आंकड़ों (अर्थात् पैन प्राप्त करने के समय उपलब्ध कराए गए विवरण) में कोर्इ परिवर्तन “नए पैन कार्ड के लिए प्रतिवेदन अथवा/तथा पैन आंकड़ों में परिवर्तन अथवा संशोधन” के रूप में विवरण की प्रस्तुति द्वारा आयकर विभाग को सूचित किया जाना चाहिए।

एक व्यक्ति दो पैन नहीं रख सकता:

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार एक व्यक्ति एक से अधिक पैन नहीं रख सकता। यदि एक व्यक्ति को पैन आवंटित हो गया है, तो वह दूसरे पैन की प्राप्ति के लिए आवेदन नहीं कर सकता। आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 272 (ख)  के अंतर्गत एक से अधिक पैन रखने पर रु. 10,000 के जुर्माने का प्रावधान है।अतः यदि एक व्यक्ति को एक से अधिक पैन आवंटित हो गया है तो उसे तुरंत अतिरिक्त पैन कार्ड को वापस कर देना चाहिए।