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रियल स्टेट को राहत के संकेत

वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रस्तावों पर विचार करेगा आरबीआई

रियल एस्टेट आर्थिक मंदी से बुरी तरह बेहाल है|हाल ही में आयी लायसेज फोरास की रिपोर्ट के मुताबिक बीती सितंबर तिमाही में देश के शीर्ष 35 शहरों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 2 फीसदी की गिरावट आई| इस गिरावट का प्रमुख कारण नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) जैसे बड़े बाजारों में सुस्त प्रदर्शन|इस तिमाही में 22 शहरों की आवास बिक्री में गिरावट देखने को मिली|सरकार द्वारा घोषणाओं के बाद अब रिजर्व बैंक ने भी रियल्टी सेक्टर को प्रोत्साहन देने के संकेत दिए हैं|

क्या कहती है रिपोर्ट?

हालिया प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 14 शहरों में आवास की कीमतों में गिरावट आई है|इस दौरान वेटेड एवरेज प्राइस भी बीते वर्ष की तुलना में 1 प्रतिशत घटा है|हालांकि इसके विपरीत नौ शहरों में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई| टीयर 1 वर्गीकरण के शहरों में हैदराबाद एकमात्र शहर है जहां आवास की कीमतों में 5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है|जबकि  टियर 2 शहर पर  महानगरों की अपेक्षा आर्थिक मंदी का प्रभाव कम हुआ है|बीती  सितंबर तिमाही में टियर 2 शहरों पर भी मंदी का दबाव नजर आया है|

गिरावट और बढ़त:

रिपोर्ट के अनुसार 2018-19 में टियर 1 शहरों में रियल एस्टेट की वृद्धि 5% रही|जबकि इसी दौरान टियर 2 शहरों में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गयी|तिमाही के दौरान लगभग 57% बिक्री 50 लाख रुपये से कम मुल्य वाली आवासीय परियोजनाओं में हुई|सूरत, भोपाल, नासिक, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे छोटे शहरों में बिक्री के आंकड़ों में कॉन्ट्रैक्टर निर्मित आवासीय परियोजनाओं में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी यूनिटों की बिक्री में इजाफा हुआ है| टियर 1 शहरों में कुल बिक्री में 4% की कमी हुई|सर्वाधिक 15 % कमी एनसीआर में आई|जबकि चेन्नई (9%), एमएमआर (7%) और पुणे (4%) की गिरावट आई|बढ़त दर्ज करने वाले शहरों में कोलकाता (11%), हैदराबाद (10%), अहमदाबाद (4%) और बेंगलुरु (2%) शामिल हैं|

वित्त मंत्रालय के प्रस्ताव पर आरबीआई करेगा विचार:

गौरतलब है कि बीते दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रियल एस्टेट सेक्टर को राहत पैकेज की घोषणा की थी|न्यूज़ एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार रियल एस्टेट कंपनियों को एनपीए टैग के बिना बाधा रहित फंडिंग में सहयोग करने व अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के उस प्रस्तावों पर विचार करने की संभावना है|इस प्रस्ताव में बैंकों को कंपनियों को डिफॉल्ट व स्पेशल मेंशन अकाउंट (एसएमए) के रूप में वर्गीकृत करने का फैसला लेने की बात कही गई है। अगर आरबीआई बैंकों को एनपीए या एसएमए खातों के टैग को अस्थायी रूप से हटाने के लिए एकमुश्त रोलओवर रियल्टी ऋणों की अनुमति देता है, तो यह उन मामलों के आधार पर किया जाएगा जो एक उन्नत चरण में हैं, लेकिन पुनर्भुगतान के संकट के कारण रुकी हुई हैं।सूत्रों ने कहा कि यह पूरे उद्योग के लिए नहीं है, बल्कि अच्छी स्थिति वाली परियोजनाओं के लिए है, जिस पर आरबीआई द्वारा अधिकृत किए जाने के बाद बैंक वाणिज्यिक निर्णय लेंगे।